झूठे आरोप और जातीय वैमनस्यता फैलाने का आरोप: म.प्र. हाई कोर्ट अधिवक्ता संघ ने वरिष्ठ वकील को थमाया कारण बताओ नोटिस
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ ने वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। संघ ने उनसे पूछा है कि क्यों न उनकी सदस्यता समाप्त कर दी जाए और उनकी सनद निरस्त करने हेतु मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद को पत्र लिखा जाए।
-आखिर किस मामले ने पकड़ा है तूल
नोटिस के अनुसार, सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने अधिवक्ता संघ के विरुद्ध झूठे और निराधार आरोप लगाए हैं। पत्र में उल्लेख है कि ठाकुर ने माननीय मुख्य न्यायमूर्ति की अदालत में मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग अधिवक्ता कल्याण संघ के लेटरपैड पर एक पत्र पेश किया। इसमें दावा किया गया कि ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा को 13 जनवरी 2026 को अधिवक्ता संघ द्वारा आमंत्रित किया गया था, जबकि संघ के अनुसार यह पूरी तरह असत्य है। आरोप है कि उनके बयानों और मीडिया में किए गए प्रचार से अधिवक्ता समुदाय के बीच जातीय वैमनस्यता पैदा हुई है, जो एक सीनियर एडवोकेट की गरिमा के प्रतिकूल है। नोटिस में स्पष्ट किया गया कि 13 जनवरी की जिस घटना में सचिव पारितोष त्रिवेदी, निखिल तिवारी और डिप्टी एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा की उपस्थिति का दावा किया गया था, वह सीसीटीवी फुटेज में गलत पाया गया है। वे तीनों घटना स्थल पर मौजूद ही नहीं थे। यह नोटिस मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ, जिला अधिवक्ता संघ और हाई कोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन की 16 जनवरी 2026 को हुई संयुक्त बैठक में लिए गए सर्वसम्मति के निर्णय के बाद जारी किया गया है।
इन पदाधिकारियों के हैं हस्ताक्षर
नोटिस पर अधिवक्ता संघ के प्रमुख पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें धन्य कुमार जैन (अध्यक्ष, म.प्र. उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ),मनीष मिश्रा (अध्यक्ष, जिला अधिवक्ता संघ),संजय अग्रवाल (अध्यक्ष, हाई कोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन), योगेश सोनी (सह-सचिव), ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी (सचिव, जिला अधिवक्ता संघ) व सौरभ भूषण श्रीवास्तव (सह-सचिव) शामिल हैं। अधिवक्ता संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो संघ उनके विरुद्ध आगे की अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।
