अहीर होकर तू चोटी रखता है...! आक्रोश


रीवा में युवक की शिखा उखाड़ने व मारपीट के विरोध में जबलपुर में प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

जबलपुर। रीवा जिले के थाना बैकुंठपुर अंतर्गत एक युवक के साथ हुई अमानवीय मारपीट और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली घटना के विरोध में आज जबलपुर में भारी आक्रोश देखा गया। संयुक्त पिछड़ा वर्ग मोर्चा, अनुसूचित जाति-जनजाति संगठन, अखिल भारतीय यादव युवा महासभा और बौद्ध महासभा के कार्यकर्ताओं ने घंटाघर चौक पर एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया और डिप्टी कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

क्या है पूरा मामला

​शिकायत के अनुसार, रीवा जिले के रोहित यादव के साथ दीपक पांडे और उसके दो साथियों ने बेरहमी से मारपीट की। आरोप है कि आरोपियों ने रोहित को जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। रोहित ने अपनी धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान हनुमान के नाम पर पिछले 7 वर्षों से 12 इंच लंबी शिखा (चोटी) रखी थी। आरोपियों ने जबरन उसकी शिखा उखाड़ दी और यह कहते हुए धमकाया कि अहीर होकर चोटी रखने का अधिकार सिर्फ ब्राह्मणों को है। प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन से मांगें की है कि ​आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए। ​दोषियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही हो। ​पीड़ित परिवार को उचित सुरक्षा प्रदान की जाए।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए, जिनमें रामरतन यादव, बैजनाथ कुशवाहा, घनश्याम यादव, इंद्र कुमार पटेल, नोखे लाल प्रजापति, रामराज पटेल, वृंदावन वर्मा, रामदास यादव, छोटे पटेल, धर्मेंद्र विश्वकर्मा, सोमवारू कोल, अमित पांडे, राजेंद्र पिल्ले, शशांक यादव, घनश्याम चक्रवर्ती, जितेंद्र यादव, अशोक यादव, संजय सेन, संजय यादव, गया प्रसाद कुशवाहा, परमानंद साहू, मनोज बाघमारे, प्रमोद सेन, प्रहलाद बौद्ध, मुरारी लाल चक्रवर्ती, सुंदर बाबा, धर्मेंद्र कुशवाहा, अनिल बंशकार, अरविंद कुशवाहा, संजू ठाकुर, भोला कोरी, राजेश कोरी, सीताराम पटेल, भगवान दास पटेल, डॉ. बालमुकुंद यादव, विजय यादव, प्रहलाद यादव, सम्यक बौद्ध, जगदीश नन्हेंट, सुरेंद्र यादव, उमेश यादव, शारदा प्रसाद यादव, अमृतलाल नागर, इंद्र कुमार, शैलेश लोधी, आकाश यादव, नीलचंद यादव, ओपी यादव, मनोज चौधरी, नरेश चक्रवर्ती, देवेंद्र यादव, राजेश यादव, दीपक यादव एवं कृष्णा चौधरी। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की जातिवादी मानसिकता समाज के लिए घातक है और यदि शीघ्र कठोर कार्यवाही नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

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