जबलपुर। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी वंदना सिंह की अदालत ने गिरफ्तारी वारंट के थाने से गायब होने या उपलब्ध न होने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) गोहलपुर को इस पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामला विजय नगर निवासी रामनाथ पटेल द्वारा वर्ष 2016 में दायर एक चेक बाउंस के परिवाद से जुड़ा है। आवेदक ने आरोपी पुरुषोत्तम तिवारी को उसकी पत्नी के इलाज के लिए 1 लाख 32 हजार रुपये उधार दिए थे। इसके बदले दिया गया चेक बैंक में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया था। आरोपी ने कोर्ट द्वारा समन, जमानती वारंट और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद अदालत में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, जिसके बाद 10 नवंबर 2021 को उसके विरुद्ध स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।
वकील की दलील ने खोली पोल
आवेदक के अधिवक्ता श्याम मोहन वर्मा ने दलील दी कि आरोपी जबलपुर में खुलेआम घूम रहा है, लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर रही। जब परिवादी ने थाना गोहलपुर में वारंट की तामीली के बारे में जानकारी मांगी, तो थाने की ओर से लिखित जवाब दिया गया कि अभियुक्त का वारंट थाने में उपलब्ध ही नहीं है। जबकि कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, 27 अक्टूबर 2021 के आदेश के तहत वारंट विधिवत जारी किया गया था। इस विरोधाभास पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए सीएसपी को जवाबदेही तय करने का आदेश दिया है।
