सिस्टम में 'सेंध': अधिकारियों की नाक के नीचे व्यापारियों ने बेची धान, अब नपेंगे जिम्मेदार


धान उपार्जन में करोड़ों का फर्जीवाड़ा, जांच के घेरे में 900 किसान

​जबलपुर जिले में धान उपार्जन के दौरान सामने आए फर्जीवाड़े और नान एफएक्यू धान की एंट्री ने प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। मझौली की वृहत्ताकार सेवा समिति में करीब 3 करोड़ 53 हजार रुपये की धान की फर्जी एंट्री का मामला उजागर हुआ है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। अब इस घोटाले की जांच का दायरा बढ़ गया है, जिसमें पहले केवल 174 किसान थे, वहीं अब 900 किसान जांच के घेरे में आ गए हैं।

अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध, थमाए जा रहे नोटिस

​इस घोटाले में न केवल बिचौलिये, बल्कि उपार्जन समिति के वे अधिकारी भी निशाने पर हैं जिन्हें मझौली क्षेत्र में धान की गुणवत्ता, तुलाई, खरीदी और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। प्रशासन ने इन जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में फर्जी एंट्री होती रही और उन्हें भनक तक नहीं लगी। सूत्रों के अनुसार, इस खेल में कई रसूखदार अधिकारियों की संलिप्तता के तथ्य भी सामने आ रहे हैं, जिसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद होगी।

14 हजार क्विंटल धान की कमी से खुला राज

​फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब वृहत्ताकार समिति में करीब 14 हजार क्विंटल धान की शॉर्टेज (कमी) पाई गई। जांच में पता चला कि धान खरीदी शुरू होने के कुछ दिनों के भीतर ही व्यापारियों ने 'फर्जी किसान' बनकर अपनी उपज खपा दी थी। मझौली के अलावा सिहोरा, कटंगी और शहपुरा की कई सोसायटियों में भी इसी तरह के फर्जीवाड़े की सूचना है। प्रशासन ने उन किसानों की खरीदी पर भी रोक लगा दी है जिन्होंने अपना धान पहले ही मंडी में बेच दिया था, फिर भी व्यापारियों ने समूहों और सोसायटियों के माध्यम से अपनी पैठ बनाए रखी।

एक दर्जन सोसायटियां और वेयरहाउस जांच की जद में

​प्रशासन अब उन सभी केंद्रों की कुंडली खंगाल रहा है जहां गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। इनमें एक दर्जन से ज्यादा सोसायटियां और स्व-सहायता समूह शामिल हैं। विशेष रूप से उन केंद्रों की जांच की जा रही है जहां वेयरहाउस को अधिग्रहण कर धान का भंडारण किया गया था। पारस वेयरहाउस से जुड़ी सोसायटियों सहित कई अन्य केंद्रों पर पूर्व में हुई जांच के बाद भी अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, आरोपित रत्नेश भट्ट द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर रोके गए भुगतानों के बाद अब सभी संदिग्ध किसानों के सत्यापन की तैयारी है।

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