नई दिल्ली। रेलवे बोर्ड ने यात्रियों को दी जाने वाली पीआरएस (पैसेंजर एसोसिएशन सिस्टम) सुविधा को लेकर नीति में संशोधन किया है। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भारतीय रेलवे टिकटिंग व्यवस्था को तेजी से डिजिटल प्लेटफार्म की ओर ले जा रही है।
वर्तमान में लगभग 87 प्रतिशत पीआरएस टिकट आनलाइन बुक किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से यूटीएस (अनरिजर्वड टिकट सिस्टम) को भी डिजिटल माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें रेल वन जैसे एप अहम भूमिका निभा रहे हैं। जिन एनआरएच-पीआरएस (नान रेलवे हास्टिंग -पीआरएस ) स्थानों पर प्रतिदिन 25 से कम टिकट लेन-देन हो रहे हैं, वहां रेलवे द्वारा स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
रेलवे बोर्ड ने कहा है कि ऐसे कम उपयोग वाले एनआरएच-पीआरएस स्थानों को पीआरएस कम यूटीएस टर्मिनल में बदला जा सकता है, इसके लिए उपलब्ध स्पेयर मशीनों का उपयोग किया जाएगा, इन स्थानों पर कोई नया रेलवे स्टाफ तैनात नहीं किया जाएगा। वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण देकर पीआरएस -कम-यूटीएस प्रणाली के लिए तैयार किया जाएगा।
पीआरएस सुविधा भी हो सकती है बंद
यदि किसी स्थान पर टिकट की संख्या लगातार घट रही हो और प्रतिदिन 25 से कम रह गया हो, तो संबंधित परिसर के प्रबंधन से परामर्श कर यह जांच की जाएगी कि जब पीआरएस और यूटीएस टिकट आनलाइन उपलब्ध हैं, तब क्या एनआरएच-पीआरएस सुविधा बंद की जा सकती है।
