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एमपी हाईकोर्ट ने पुलिस निरीक्षक को सेवानिवृत्ति के पश्चात जारी आरोप पत्र की जांच पर लगाई रोक

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के जबलपुर खंडपीठ के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी ने सेवा निवृत पुलिस इंस्पेक्टर डिगोंदा, टीकमगढ को जारी और पत्र की विभागीय जांच पर रोक लगा दी है। 

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय शंकर रायजादा एवं अमित रायजादा ने बताया कि आर पी चौधरी, पुलिस निरीक्षक के पद से वर्ष 202ह्र मे सेवानिवृत्त हो गये थे एवं उन्हें सेवानिवृत्ति के चार वर्ष पश्चात एक विभागीय आरोप पत्र पुलिस अधीक्षक ने जारी किया।  याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया है कि उत्तरदाताओं ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976  प्रावधानों को दर किनार कर  यह आरोप-पत्र जारी किया है। क्योंकि जिस घटना के लिए याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप-पत्र जारी करने का आधार बनाया जा रहा है वह जनवरी 2020 की है एवं आरोप पत्र अगस्त 2024 को जारी किया गया है, जबकि उपरोक्त परिपत्र ऐसी किसी भी विभागीय कार्यवाही को प्रतिबंधित करता है। 

अधिवक्ता द्वारा आगे यह भी तर्क दिया गया है कि आरोप-पत्र पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी किया गया है, लेकिन उक्त आरोप-पत्र पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी नहीं किया जा सकता था, क्योंकि 12.07.2013 के परिपत्र के अनुसार, निरीक्षक के पद को द्वितीय श्रेणी  पद घोषित किया गया था। इसलिए, पुलिस अधीक्षक के पास याचिकाकर्ता को आरोप-पत्र जारी करने की शक्ति नहीं है।

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