khabar abhi tak

महिला की फोटो खींचने मात्र से नहीं बनता आपराधिक केस


हाईकोर्ट ने अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर की निरस्त

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल किसी महिला की फोटो खींचना अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कहा कि जब तक महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का स्पष्ट इरादा साबित न हो, तब तक कोई आपराधिक दायित्व नहीं बनता। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने रीवा के अधिवक्ता सुभाष तिवारी के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण को निरस्त करते हुए उन्हें बड़ी राहत प्रदान की है।

मामले में क्यों व्यक्त किया गया सन्देह

यह मामला रीवा जिले के सोहागी थाना क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता महिला का आरोप था कि 31 मई 2024 को जब वह बाजार में अपने दोस्तों के साथ जूस पी रही थी, तब अधिवक्ता सुभाष तिवारी ने उसकी फोटो खींची और बदनाम करने की धमकी दी। हालांकि, इस घटना की एफआईआर करीब पांच महीने बाद 17 अक्टूबर को दर्ज कराई गई थी। हाईकोर्ट ने एफआईआर में हुई इस असामान्य देरी को गंभीरता से लिया और इसे मामले की सत्यता पर संदेह का आधार माना।

पुरानी रंजिश को बताया वजह

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि अधिवक्ता सुभाष तिवारी, शिकायतकर्ता महिला के दादा से जुड़े एक मामले में विपक्षी पार्टी की पैरवी कर रहे हैं। इसी पेशेगत रंजिश और व्यक्तिगत प्रतिशोध के कारण उन्हें झूठा फंसाया गया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार, किसी महिला की इज्जत को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से शब्द, इशारा या वस्तु प्रदर्शित करने पर ही अपराध बनता है। इस मामले में ऐसे कोई ठोस तत्व नहीं मिले, जिससे यह साबित हो कि फोटो खींचने के पीछे कोई आपराधिक मंशा थी।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak