जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजे के लिए सालों से भटक रहे किसानों के पक्ष में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायाधीश विनय सराफ की युगलपीठ ने स्पष्ट किया है कि फसल नुकसान की स्थिति में किसान को तुरंत मुआवजा मिलना चाहिए। यह बाद में तय किया जा सकता है कि भुगतान की अंतिम जिम्मेदारी बैंक की है या बीमा कंपनी की, लेकिन इसके लिए अन्नदाता को इंतजार नहीं कराया जा सकता।
2017 से मुआवजे की राह देख रहे थे किसान
यह पूरा मामला सागर जिले की मालथौन तहसील का है। वर्ष 2017 में भारी बारिश (अतिवृष्टि) के कारण क्षेत्र के किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं। दिनेश कुमार मिश्रा सहित चार अन्य किसानों ने अपनी फसलों का नियमानुसार बीमा कराया था। जब मुआवजे का वक्त आया, तो बीमा कंपनी ने यह तर्क देकर पल्ला झाड़ लिया कि बैंक ने समय पर प्रीमियम और जरूरी डेटा उपलब्ध नहीं कराया। दूसरी ओर, बैंक भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने को तैयार नहीं था।
उपभोक्ता फोरम से लेकर हाईकोर्ट तक लड़ाई
बीमा कंपनी और बैंक के इस टालमटोल वाले रवैये के खिलाफ किसानों ने राज्य उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया, जिसने बीमा कंपनी को 100% भुगतान का आदेश दिया। इसके बाद मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम पहुंचा, जहाँ भुगतान की जिम्मेदारी 50% बैंक और 50% बीमा कंपनी पर तय की गई। बीमा कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्थगन की मांग की थी, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि 2017 से किसान भटक रहे हैं और अब बीमा कंपनी को अपने हिस्से का 50% भुगतान तत्काल करना होगा।
