एक बेटे का बेबस मां से सवाल, अमेरिका में हो सकता है इलाज
जबलपुर। कहते हैं कि एक मां के लिए उसके बच्चे की मुस्कुराहट ही उसकी दुनिया होती है, लेकिन जबलपुर के शेट्टी नगर में रहने वाली संध्या चक्रवर्ती की दुनिया इस वक्त अंधेरे के साये में है। उनका 5 साल का मासूम बेटा, ऋषि रजक, एक ऐसी दुर्लभ और लाइलाज बीमारी की गिरफ्त में है, जिसने इस नन्ही सी उम्र में उसे बिस्तर पर ला दिया है। ऋषि को नहीं पता कि जिस इलाज के लिए उसकी मां दर-दर भटक रही है, उसकी कीमत 2 करोड़ रुपये है,ये एक ऐसी रकम, जो इस साधारण परिवार के लिए किसी पहाड़ को हिलाने जैसा है।
अमेरिका में है इलाज मुम्किन
भारत के कई बड़े अस्पतालों और विशेषज्ञों के चक्कर काटने के बाद डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। जवाब मिला है कि ऋषि को बचाने का आखिरी और एकमात्र रास्ता अमेरिका में होने वाला विशेष इलाज है। एक मां के लिए इससे बड़ी बेबसी क्या होगी कि उसके कलेजे के टुकड़े की जान की कीमत रुपयों के तराजुओं में तौली जा रही है। संध्या की आंखों का पानी सूख चुका है, अब बस उम्मीदों की एक आखिरी डोर बची है।
सरकार से उम्मीद की लौ: डिप्टी सीएम के सामने छलका दर्द
अपनी ममता और बेटे के जीवन को बचाने की जिद लिए संध्या चक्रवर्ती ने मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से मुलाकात की। हाथों में इलाज की फाइलें और आंखों में छलकती पीड़ा लिए जब संध्या ने डिप्टी सीएम के सामने गुहार लगाई, तो वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई। उन्होंने बताया कि समय तेजी से निकल रहा है और अगर ऋषि को जल्द अमेरिका नहीं ले जाया गया, तो उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। संध्या ने सरकार से केवल आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि विदेश जाने से जुड़ी जटिल औपचारिकताओं को पूरा करने में भी सहयोग मांगा है। उनका कहना है कि मेरा इकलौता सपना अपने बेटे को फिर से हंसते-खेलते देखना है, और इसके लिए मैं किसी भी हद तक जाने को तैयार हूं। डिप्टी सीएम ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए अधिकारियों को तुरंत आवश्यक कार्रवाई और सहायता के विकल्प तलाशने के निर्देश दिए हैं।
