जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्यालय में एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। यहां तैनात एक कर्मचारी अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग करके रेलवे कोटे की टिकटें निकाल रहा था। इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद रेलवे प्रशासन ने कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
हर दिन निकाली जाती थीं 3 से 4 टिकट
रेलवे में मंत्री, सांसद, और अन्य विशिष्ट लोगों के लिए टिकट का कोटा तय होता है। इन कोटे की टिकटें वीआईपी श्रेणी के अंतर्गत आती हैं। जबलपुर मुख्यालय में तैनात अधिकारी का बाबू इस कोटे की टिकटों में सेंधमारी कर रहा था। आरोपी बाबू हर दिन 3 से 4 टिकटें कंफर्म करवा रहा था। इनमें दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे महानगरों की यात्राएं शामिल थीं। गर्मियों के मौसम में ट्रेनों में भारी भीड़ के बीच इस तरह से टिकट निकालना नियमों का सीधा उल्लंघन है।
अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल
यह पूरा खेल अधिकारियों के नाम पर कई महीनों से चल रहा था। पहले यह कर्मचारी सीसीएम अजय प्रकाश के पास पदस्थ था, और उनके सेवानिवृत्त होने के बाद सीसीएम राजेश शर्मा के कार्यालय से संबद्ध हो गया था। आरोपी बाबू दोनों अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल करके हेड ऑफिस कोटा लगाता था। जब दिल्ली में बैठे एक कर्मचारी को इस गतिविधि पर संदेह हुआ, तो उसने सीधा फोन लगाकर अधिकारी से पुष्टि की। इस बातचीत में फर्जीवाड़े की बात स्पष्ट हो गई। अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग करके अमित कुमार आनंद द्वारा यह टिकट निकाली जा रही थीं।
जांच के लिए कमेटी का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम मध्य रेलवे ने आरोपी अमित कुमार आनंद को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही इस अनियमितता की जांच के लिए एक कमेटी का भी गठन किया गया है। अधिकारियों के अनुसार कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी और उसके बाद ही आगामी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हर्षित श्रीवास्तव ने इस बात की पुष्टि की है और बताया कि पूरे प्रकरण की गहनता से जांच की जा रही है ताकि ऐसे अन्य मामलों पर भी रोक लगाई जा सके।
