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डीआरएम आफिस की केंटीन के निजीकरण का विरोध शुरू, रेलवे यूनियनों ने आर-पार के संघर्ष का किया ऐलान

जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय स्थित स्टाफ कैंटीन को बंद कर उसे निजी हाथों में सौंपने की खबर पर बवाल मच गया है। दोनों प्रमुख श्रमिक संगठनों ने पमरे मजदूर संघ व पमरे एम्पलाइज यूनियन ने आर-पार के संघर्ष का ऐलान करते हुए डीआरएम को लेटर लिखकर केंटीन को बंद करने के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है.

उल्लेखनीय है कि यह कैंटीन अंग्रेजों के समय से रेल कर्मचारियों को नो लॉस, नो प्रॉफिट पर चाय, नाश्ता, लंच आदि कर्मचारियों को मुहैया कराया जा रहा है. यहां के खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता व किफायती कीमतों के चलते कर्मचारियों के बीच तो लोकप्रिय है ही, साथ ही आसपास के आम लोग भी इस कैंटीन में पहुंचकर लजीज व्यंजन का लुत्फ उठाते रहे हैं.

कर्मचारियों को इस बात का डर सता रहा

रेल कर्मचारियों में इस बात की चर्चा है कि ये कैंटीन यदि निजी हाथों में चली जाती है तो कर्मचारियों को चाय, नाश्ता, भोजन जो रियायती दरों पर उपलब्ध होती है, वो नहीं मिल सकेगा. साथ ही जो क्वालिटी कंट्रोल अभी तक रेल प्रशासन द्वारा किया जाता रहा है, उस पर भी नियंत्रण नहीं हो सकेगा.

कर्मचारियों के आक्रोश को देख श्रमिक संगठन सामने आये

वहीं कैंटीन को बंद कर इसके निजीकरण की तैयारियों को देख रेल कर्मचारियों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है, जिसे देखते हुए श्रमिक संगठनों ने भी प्रशासन के समक्ष आपत्ति जताई है।

एकमात्र मान्यता प्राप्त डबलूसीआरएमएस ने लिखा लेटर

पश्चिम मध्य रेलवे की एकमात्र मान्यता प्राप्त संगठन पमरे मजदूर संघ के मंडल सचिव डीपी अग्रवाल ने कहा कि वे डीआरएम आफिस की कैंटीन का पुरजोर विरोध करते हैं और उन्होंने इसके विरोध में पत्र भी डीआरएम को लिखा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कैंटीन को बंद करने के प्रयासों का संघ भत्र्सना करती है और इसके लिए जो जरूरी कदम होंगे वे उठाये जायेंगे.

यूनियन ने कहा- हमने पहले भी विरोध किया

वहीं दूसरी तरफ डबलूसीआरईयू के मंडल सचिव रोमेश मिश्रा ने कहा- पूर्व में भी इस कैंटीन को बंद करने का प्रशासन प्रयास करता रहा है, लेकिन यूनियन के कड़े विरोध के बाद ऐसा नहीं होने दिया गया. अब एक बार फिर रेल प्रशासन इसका निजीकरण करने जा रहा है, जिसका यूनियन विरोध करती है और इसके लिए डीआरएम को लेटर लिखकर आपत्ति जताई जा रही है.


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