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सरकारी तंत्र सुस्त,बिचौलियों की बल्ले-बल्ले


धान खरीदी: खरीदी केंद्रों में नहीं पहुंच रहा बारदाना, किसान व्यापारियों को सस्ते में धान बेचने मजबूर

जबलपुर। जिले में धान खरीदी की रफ्तार बेहद सुस्त है। दिसंबर का आधा महीना बीतने के बावजूद खरीदी केंद्रों पर हालात नहीं सुधरे हैं। किसानों का आरोप है कि अधिकांश खरीदी केंद्रों में बारदाने की भारी कमी बनी हुई है, जिससे वे समर्थन मूल्य पर धान बेचने नहीं पहुंच पा रहे। कागजों में भले ही तेजी से खरीदी दर्शाई जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। किसानों का कहना है कि शासन द्वारा तय लक्ष्य का आधा भी पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है। बारदाना नहीं मिलने के कारण किसान मजबूरी में अपनी उपज कृषि उपज मंडी या सीधे बिचौलियों को समर्थन मूल्य से 400 से 500 रुपये कम में बेचने को विवश हैं।

खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था, मंडी में उमड़ रहा धान

अधिकांश खरीदी केंद्रों पर किसानों को या तो बारदाना उपलब्ध नहीं कराया जा रहा या फिर जानबूझकर प्रक्रिया को धीमा रखा जा रहा है। किसानों का आरोप है कि ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिससे वे हताश होकर बिचौलियों के पास धान बेच दें।
सूत्रों का कहना है कि कई खरीदी केंद्रों पर पिछले दरवाजे से बिचौलियों का धान अंदर लिया जा रहा है, जिसमें केंद्र प्रभारी और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की भी चर्चा है। किसानों का कहना है कि वे 2300 रुपये प्रति क्विंटल की जगह 1800 से 1900 रुपये में धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं।

शासन के दावों पर सवाल

एक ओर शासन यह दावा कर रहा है कि तय नियमों के अनुसार धान की खरीदी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर हकीकत यह है कि किसान खरीदी केंद्रों तक पहुंच ही नहीं पा रहे। इसके उलट कृषि उपज मंडियों में धान की आवक दोगुनी रफ्तार से हो रही है।
किसानों का कहना है कि यदि शासन वास्तव में समर्थन मूल्य पर खरीदी चाहता है तो समय पर बारदाना और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। अन्यथा बिचौलियों, खरीदी केंद्र प्रभारियों और अधिकारियों की मिलीभगत का खामियाजा किसान को ही भुगतना पड़ेगा।

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