55 दिनों तक नहीं होंगे 'मंगल काज'

 


थम गई शहनाइयों की गूंज,फरवरी से पुनः शुरू होंगे उत्सव

जबलपुर। दिसंबर की शुरुआत तक जिन गलियों में विवाह गीतों की रौनक थी, वहाँ अब अचानक सन्नाटा महसूस होता है। वजह है,विवाह के शुभ लग्नों का थम जाना। ठीक 55 दिनों तक न तो मंगलगीत सुनाई देंगे, न बारात की गूँज। हिंदू पंचांग के अनुसार यह समय खरमास और पौष माह का है, जिसे शुभ कार्यों के लिए अनुपयुक्त माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जब सूर्य धनु राशि में रहते हैं, तब शुभ कार्यों की शुरुआत को जीवन की प्रगति के अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए पूजा, गृह प्रवेश से लेकर विवाह तक सभी महत्वपूर्ण कार्य टाल दिए जाते हैं। यही वजह है कि शहर के बैंड बाज़े, मैरिज गार्डन और कैटरर्स भी इन दिनों सामान्य दिनों से शांत दिखाई देते हैं।

खरमास की यह परंपरा क्यों है खास?

खरमास को भारतीय संस्कृति में आत्मचिंतन और ठहराव का महीना माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किए गए नए कार्य देर से फल देते हैं या बाधाओं का सामना कराते हैं। इसलिए परिवारजन विवाह जैसे मांगलिक कार्यों को टालकर इस अवधि को बीतने देते हैं। हालांकि धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और दान-पुण्य इस समय भी निर्बाध चलते रहते हैं। लेकिन विवाह,जो दो परिवारों के मिलन का बड़ा अवसर है,उसे पूर्ण शुभता में ही किया जाना श्रेष्ठ माना गया है। इस बार 55 दिन का यह अंतराल लोगों को आने वाले मंगलमय दिनों की प्रतीक्षा में और उत्सुक कर रहा है। 6 फरवरी से शहनाइयाँ फिर गूँजने लगेंगी और विवाह सीजन एक बार फिर रौनक लौटाएगा।

आने वाले वर्ष के प्रमुख शुभ विवाह मुहूर्त

फरवरी: 4, 8, 10, 12, 16  
मार्च: 3, 14  
अप्रैल: 9, 12, 15, 20, 21, 25, 30  
मई: 1, 3, 9, 12, 13, 14, 21  
जून: 26, 30  
जुलाई: 1, 2, 6, 7, 8, 10  
नवंबर: 7, 20, 21, 24, 29  
दिसंबर: 1, 6, 9, 11,13

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