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हर दावेदार को चाहिए जेडीए अध्यक्ष का पदभार



भाजपा में राजनीतिक नियुक्तियों की सुगबुगाहट तेज, जबलपुर में संगठन और सत्ता के कई चेहरे सक्रिय, दिल्ली से भोपाल तक लॉबिंग,बिहार चुनाव  के बाद होगी बड़ी बैठक

जबलपुर।  भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के बाद अब सबकी नजर भाजपा की राजनीतिक नियुक्तियों पर टिकी हुई हैं। जबलपुर के प्रत्येक दावेदार की जेडीए अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने की तमन्ना है। यदि ये इच्छा पूरी नहीं हुई तो फिर अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा। राजनीतिक नियुक्ति की दौड़ में जहां भाजपा में संगठन के पदों पर बैठे पदाधिकारी हैं, वहीं वे नेता हैं,जो चाहते हैं कि उनका चहेता इस कुर्सी पर काबिज हो।

-जबलपुर से इन दावेदारों पर दांव

जबलपुर की बात करें तो दो पूर्व मंत्री ‘ारद जैन और अंचल सोनकर को जेडीए अध्यक्ष की कुर्सी का  दावेदार माना जा रहा है। इसके अलावा पूर्व अध्यक्ष जीएस ठाकुर भी इस सूची में हैं,क्योंकि जबलपुर में भाजपा के नगराध्यक्ष को जेडीए अध्यक्ष बनते कई बार देखा गया है। पूर्व महापौर सदानंद गोडबोले का नाम भी दौड़ में है,क्योंकि इन पर संघ की विशेष कृपा मानी जाती है।  इसी क्रम में संदीप जैन का नाम भी आता है,ये नाम इसलिए महत्वपूर्ण है,क्योंकि संगठन के लिए श्री जैन ने लंबे समय तक काम किया है। 

 -बिहार चुनाव के बाद बढ़ेगी हलचल

फिलहाल, पार्टी हाईकमान ने बिहार विधानसभा चुनाव की वोटिंग पूरी होने तक नियुक्तियों पर रोक लगाई है। माना जा रहा है कि मतदान प्रक्रिया खत्म होते ही प्रदेश में सत्ता और संगठन की बड़ी बैठक होगी, जिसमें राजनीतिक नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नियुक्तियों की तैयारी पहले ही पूरी कर ली गई थी, लेकिन बिहार चुनाव के चलते यह प्रक्रिया रोक दी गई थी। माना जा रहा है कि 15 नवंबर के बाद प्रदेश पदाधिकारियों के   दौरे के दौरान नियुक्तियों पर चर्चा की जाएगी। इसी दौरान युवा मोर्चा और महिला मोर्चा सहित दो प्रमुख मोर्चों पर भी सहमति बनने की संभावना है। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही नामों का ऐलान शुरू कर दिया जाएगा।

-बड़े नेताओं में तालमेल बिठाना होगा कठिन

इस बीच क्षेत्रीय क्षत्रपों ने अपने समर्थकों को एडजस्ट कराने के लिए लॉबिंग तेज कर दी है। विधायकों, सांसदों और पूर्व मंत्रियों तक ने सक्रियता बढ़ा दी है। बड़े नेताआंे के बीच तालमेल बिठाना बड़ी चुनौती होगी। वहीं, भाजपा में शामिल हुए कई पूर्व कांग्रेसी नेताओं को अब भी किसी पद की प्रतीक्षा है। ऐसे नेताओं के लिए राजनीतिक नियुक्तियां ही आखिरी उम्मीद मानी जा रही हैं। 

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