मप्र मेडिकल काउंसिल ने नोटिस जारी कर मांगी जानकारी, जबलपुर के चिकित्सा जगत में चर्चाएं सरगर्म, कोई भी खुलकर बोलने तैयार नहीं
जबलपुर। छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड के बाद शुरु हुई जांच-पड़ताल मंे नए फर्जीवाड़े उजागर होने का सिलसिला शुरु हो गया है। ताजा मामले में मप्र मेडिकल काउंसिल ने जबलपुर के उन तीन प्रतिष्ठित डॉक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है,जिन पर आरोपित है कि इन्होंने एक फार्मा कंपनी यूएसवी लिमिटेड के खर्च पर विदेश भ्रमण किया है। हालाकि, काउंसिल ने प्रदेश भर के डॉक्टरों को नोटिस भेजे हैं। ये सभी सालों साल से एक ही दवा कंपनी की दवाएं प्रिस्क्राइब कर रहे हैं और बदले में विदेश भ्रमण और नकद मोटी रकम बतौर कमीशन ले रहे हैं। सूत्रों के अनुसार ये मामला दस साल पुराना है और जब भी कोई घटना होती है तो काउंसिल नोटिस जारी कर शांत बैठ जाता है,लेकिन इस बार हालात नियंत्रण में दिखाई नहीं दे रहे हैं।
-ये हैं जबलपुर के तीन चिकित्सक
दवा कंपनियों के हाथों की कठपुतली बनकर आम जनता के साथ बेईमानी करने का आरोप जबलपुर के जिन चिकित्सकों पर है,उनमें डॉ. विजय चावला, डॉ. नरेश कुमार बंसल,डॉ. अजय भंडारी का नाम शामिल है। जानकारी के अनुसार, काउंसिल ने इन डॉक्टरों पर स्वविवेक से कार्रवाई नहीं की है,बल्कि हाईकोर्ट मंे दायर एक याचिका के तहत मिले निर्देशों के बाद ऐसा किया है। इससे पहले भी काउंसिल औपचारिकता निभाते हुए डॉक्टरों को नोटिस जारी कर चुका है।
-ये है इस कहानी की असली तस्वीर
चिकित्सक जैसे पवित्र पेशे की ये शर्मनाक पहली बार साल 2015 में सामने आई थी,जब रायपुर के एक व्हिसल ब्लोअर और सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने 28 अगस्तए 2015 को मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने सबूतों के साथ दावा किया था कि मध्य प्रदेश 20 प्राइवेट डॉक्टर 13 जुलाई से 21 जुलाईए 2014 तक इटली के खूबसूरत शहरों वेनिस और पोर्टोरोज में घूमने गए थे। जिसका पूरा खर्च एक फार्मा कंपनी द्वारा उठाया गया था। इस प्रकरण में छत्तीसगढ़ के भी 23 डॉक्टरों के नाम है। हालाकि, मप्र में काउंसिल की धीमी कार्रवाई की वजह से डॉक्टरों पर वैधानिक कार्रवाई नहीं हो सकी,लेकिन जब विकास तिवारी ने कोर्ट का रुख किया तब काउंसिल ने नोटिस जारी कर बैंक डिटेल और यात्रा टिकटों का ब्यौरा तलब किया।
-पता सबको है, पर चुप हैं सब
इस मामले में जबलपुर के पूर चिकित्सा जगत में ये खबर आग की तरह फैली हुई है,लेकिन अधिकृत रूप से कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। अब देखना यह भी है कि चिकित्सकों से जुड़े संगठन पर इस पर क्या कार्रवाई करते हैं। दरअसल, जब डॉक्टर द्वारा कंपनी से कमीशन लिया जाता है तो इससे स्पष्ट हो जाता है कि मरीज के साथ लूट हुई है।
