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दुल्हन की सजाई गौ-माता, किया पूजन, देखें वीडियो



गोवर्धन पूजन पर शहर भर में किया गौ-अनुष्ठान, पारंपरिक तरीकों से सजाया गया गौ-वंश

जबलपुर। पांच दिनों की दिवाली में मनाया जाने वाली गोवर्धन पूजा के दिन बुधवार को शहर के विभिन्न जगहों पर गौ-वंश को परंपरागत तरीके सजाया गया। गौ-माता को दुल्हन की तरह सजाकर उसका पूजन किया गया। गौ-अनुष्ठान में विधिवत तरीकों से पूजन किया गया है। 


चेरीताल में गोवर्धन पूजन सामूहिक रूप से किया गया है। इसमें गौ-माता को चांदी के आभूषणों से सजाया गया। इस दौरान पूजन कर उन्हें विशेष पकवान अर्पित किए गए हैं। लोगों का कहना था कि यह पारंपरिक पूजन है, जो दिवाली के बाद मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण के उस दिव्य स्वरूप को समर्पित है, जब उन्होंने अपने नन्हे हाथों से गोवर्धन पर्वत उठाकर वृंदावन वासियों की रक्षा की थी। हिंदू धर्म और भारत के कुछ जगहों पर इस दिन भव्य अन्नकूट और गोवर्धन पूजा का आयोजन होता है। लोग घर में भी गोवर्धन बनाकर पूजा करते हैं और भक्तजन अन्नकूट खिचड़ी या सब्जी बनाकर गिरिराज को अर्पित करते हैं। यह पूजा समृद्धि, संरक्षण और आभार का प्रतीक है। इस दिन घरों में बनने वाले व्यंजन सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि श्रद्धा और भक्ति का जुड़ाव है। 


पंडित कामता प्रसाद तिवारी कहते हैं कि भारतीय संस्कृति में गौ को माता मानकर पूजा जाता है। गोदान को सर्वश्रेष्ठ दान कहा जाता है। गाय ने भले ही सारे विश्व वसुधा को बनाया ना हो किन्तु वह पोषण संवर्धन सभी का करती है। इसी से हमारे यहाँ कहा गया है, गावो विश्वस्य मातरः। वह न केवल मनुष्य बल्कि पशु.-पक्षी, नदी, तालाब, खेत, जंगल, हवा, पानी, आकाश आदि सभी का पालन-पोषण करती है। उन्हें शुद्ध पवित्र रखती है। इस दिन मङ्गलाचरण, पवित्रीकरण, तिलक, कलावा, गौशाला. भूमि पूजन (स्पर्श) गुरु, गायत्री, गणेश, गौरी आवाहन के पश्चात् गोपाल एवं गोमाता का आवाहन पूजन किया जाता है।

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