नवागत कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के सामने चुनौतियां - सीएम हेल्पलाइन और ई-ऑफिस में बढ़त बड़ा टास्क
जबलपुर। एक आम शहरी के कल्याण से जुड़ी योजनाओं में जबलपुर जिला बुरी तरह से पिछड़ा हुआ है। कुछ योजनाओं में तो जबलपुर का नाम अंतिम पांच तक पहुंच गया है। नए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के सामने जबलपुर को आगे बढ़ाने का बड़ा टास्क है। उल्लेखनीय है कि सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों का निराकरण करने में जबलपुर करीब एक साल से लगातार पीछे की ओर जा रही है। ई.ऑफिस में भी जबलपुर की स्थिति चिंताजनक ही है। हालाकिए श्री सिंह ने जिस तरह से पहले दिन से ही योजनाओं की समीक्षा की है और वस्तुस्थिति को बारीकी से समझा हैएउससे उम्मीद तो जगती है पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
-किस योजना में कितने पिछड़े
ई.ऑफिस-जबलपुर - जिला ई.ऑफिस की प्रदेशस्तरीय सूची में शुरुआत से ही निचली पायदान पर है। प्रक्रिया जारी हैएलेकिन बेहद सुस्त और बेमन से। कुछ दफ्तरों ने अच्छा काम किया है पर ओवरऑल जिले की स्थिति चिंताजनक है।
.सीएम हेल्पलाइन- डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त बीत गयाएलेकिन सीएम हेल्पलाइन के निराकरण में जबलपुर जिला प्रथम पांच में भी जगह नहीं बना सका है। साल 2025 की बात करें तो नौ महीने में सीएम हेल्पलाइन में जबलपुर का नाम निरंतर नीचे की ओर दौड़ रहा है। तत्कालीन कलेक्टर इलैयाराजा टी के वक्त सीएम हेल्पलाइन में जबलपुर लगातार नौ महीनों पर पहले नंबर पर रह चुका है।
.राजस्व वसूली- राजस्व वसूली के कॉलम में भी जबलपुर का प्रदर्शन फीका ही है। शायद ही किसी को स्मरण हो कि जबलपुर रेवेन्यू कलेक्शन में ऊपरी पायदान पर कब था। हालाकिए समीक्षा बैठकों और दिशा.निर्देशों का दौर जारी है।
.राशन वितरण प्रणाली- राशन वितरण प्रणाली को और पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया खाद्य विभाग ने शुरु तो की हैएलेकिन रफ्तार कछुए से भी धीमी है। ई.केवाईसी में कुछ अनियमितताएं उजागर हुईं और नोटिस भी जारी हुए हैं।
-क्या जारी रहेंगी ऐसी कार्रवाईयां
-निजी स्कूलों पर शिकंजा-पूर्व कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना द्वारा निजी स्कूलों की अनाप.शनाप फीस वृद्धि पर लगाम लगाने शुरु किये गये अभियान को जारी रखना और स्कूलों को बेलगाम होने से रोकना नवागत कलेक्टर के लिए अहम चुनौती होगी।अभिभावकों के दिलों में जागा भरोसा क्या आगे भी कायम रहेगा।
-खाद्यान्न खरीदी और घोटाले-बीते डेढ़ साल में गेहूं और धान खरीदी में जिस ढंग से घोटाले उजागर हुए हैंएउससे सरकारी अमला और पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। पूर्व कलेक्टर श्री सक्सेना ने कार्रवाई तो की हैंएलेकिन अभी भी कसर शेष है। देखना होगा कि नए कलेक्टर इन घपलों.घोटालों को रोकने के लिए क्या करेंगे।
-अफसर होंगे इधर.उधर
जानकारों का दावा है कि नए कलेक्टर जल्दी ही अफसरों की जमावट अपने हिसाब से करेंगे। श्री सिंह ने योजनाओं की समीक्षा बैठकों में कई अफसरों की जानकारियों और कार्य की प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की है। उन अधिकारियों के आराम के दिन भी शायद समाप्त हो गये हैंए जिनका अभी पता भी नहीं चलता है कि वो दफ्तर में हैं या नहीं। हालाकिए अधिकारी भी अभी नए कप्तान का रुख भांपने में लगे हुए हैंएक्योंकि अक्सर अमला वैसे ही काम करने में जुट जाता हैएजैसा अफसर चाहते हैं।
