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जेडीए अध्यक्ष की कुर्सी के लिए सबसे ज्यादा संग्राम

 


प्रदेश कार्यकारिणी में स्थान न पाने वाले भाजपाई अब प्राधिकरण, आयोग और मंडलों में एडजस्ट होने संघर्षरत,बिहार चुनाव के बाद तेज होगी प्रक्रिया,बड़े नेताओं के कृपापात्रों में कांटे की टक्कर


जबलपुर। भाजपा के प्रदेश संगठन की कार्यकारिणी में जगह प्राप्त न कर पाने वाले भाजपाई अपनी किस्मत का रोना छोड़कर नई जंग में जुट गये हैं। जबलपुर के प्रत्येक भाजपाई की तमन्ना है कि उसे येन-केन प्रकारेण जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की कुर्सी दे दी जाए। कुर्सियां और भी हैं,लेकिन जेडीए अध्यक्ष का तमगा क्यों मंागा जा रहा है,ये किसी से छिपा नहीं है। हालाकि, प्रदेश की कार्यकारिणी मंे अपने चहेतों को पद-प्रतिष्ठा न दिला पाने वाले जबलपुर के दिग्गज नेताओं ने भी जेडीए अध्यक्ष की नियुक्ति को इज्जत का सवाल बना लिया है। पहले चरण में, जबलपुर के एक दिग्गज भाजपाई नेता के चहेते का नाम सबसे उुपर था,लेकिन अब ताजा हालात क्या हैं,इसकी भनक नहीं लग पा रही है। 

-बिहार चुनाव की समाप्ति का इंतजार

प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल के बाद अब राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर हलचल तेज हो गई है। नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के साथ ही वे नेता, जो सूची में शामिल नहीं हो सके, अब निगम-मंडल और आयोगों में पद पाने की उम्मीद लगाए हुए हैं। संगठन में संतुलन साधने के बाद अब पार्टी का ध्यान इन नियुक्तियों पर केंद्रित हो गया है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व दिसंबर में बिहार चुनाव संपन्न होने के बाद राजनीतिक नियुक्तियों पर विचार करेगा। माना जा रहा है कि ऐसे नेताओं को निगम-मंडलों में स्थान दिया जाएगा, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं और जिन्हें इस बार कार्यकारिणी में जगह नहीं मिल पाई है। प्रदेश कार्यकारिणी में कई पुराने और नए चेहरों को शामिल किया गया है। हालांकि, कुछ वरिष्ठ नेताओं को प्रतीक्षा सूची में रखा गया है ताकि उन्हें आगे चलकर अन्य जिम्मेदारियों से जोड़ा जा सके। 

-अंतिम निर्णय कौन करेगा

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संगठन ने यह सुनिश्चित किया है कि अनुभव और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व दोनों का समन्वय बना रहे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठन में शामिल नहीं किए गए कई सक्रिय नेताओं के नामों को निगम-मंडलों में नियुक्त किया जा सकता है। इनमें कई वरिष्ठ नेता हैं जो लंबे समय से पार्टी और सरकार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इन पदों को लेकर आंतरिक मंथन शुरू हो गया है, जबकि अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से होगा। 

-सरकारी निकायों भी बिठाएंगे नए चेहरे

सरकारी निकायों में भी नियुक्तियां लंबे समय से लंबित हैं। अब, जब संगठन का ढांचा लगभग तैयार हो चुका है, तो उम्मीद है कि नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत में राजनीतिक नियुक्तियों की पहली सूची जारी की जा सकती है। भाजपा संगठन अब 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर काम कर रहा है। पार्टी का उद्देश्य अनुभवी नेताओं को उचित स्थान देकर संगठनात्मक मजबूती बढ़ाना है।

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