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तकनीकी खामियों वाले स्मार्ट मीटर कब तक पब्लिक की जेब में डालेंगे डाका

 
कंपनियों ने साधी शर्मनाक चुप्पी, तीन साल के बैन के बाद मुखर हुआ सवाल, कांग्रेस ने कहा जन आंदोलन करेंगे

जबलपुर। जिस स्मार्ट मीटर को तकनीकी खामियों का हवाला देकर बिजली कंपनियों ने तीन साल की रोक हासिल कर ली है, वही स्मार्ट मीटर अब भी पब्लिक के घरों में लगे हुए हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि खामियों से भरे हुए ये स्मार्ट मीटर जनता की जेब में डाका डालते रहेंगे। इस मामले में बिजली कंपनियों ने शर्मनाक ढंग से चुप्पी साध रखी है,लेकिन आम शहरी की ओर से ये सवाल मुखर हो रहा है कि आखिर वे क्यों गड़बड़ियों वाले मीटर का बिल चुकाएंगे। इधर, कांग्रेस ने कहा है कि जल्दी ही इस मामले में जन आंदोलन चलाया जाएगा और स्मार्ट मीटरों की जगह नॉर्मल मीटर चलाए जाएंगे।

-कब तक के लिए लगी है रोक

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता 31 मार्च 2028 तक टाल दी है। तकनीकी समस्याओं के चलते लगातार बढ़ते जा रहे स्मार्ट मीटर के विरोध के कारण इस अवधि बढ़ा दिया गया है। मध्य और पश्चिम विद्युत वितरण क्षेत्र की कंपनियों ने आयोग से स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता की अवधि बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। उपभोक्ताओं को राहत देते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य मीटर लगाने की स्वीकृति दे दी गई है। कंपनियों का तर्क था कि स्मार्ट मीटर मात्र बिजली खपत मापने का एक यंत्र नहीं है बल्कि एक विस्तरित विद्युत प्रणाली है जिसके चलते इसे सामान्य मीटर के स्थान पर लगाया जा रहा है।

-विरोध की वजह क्या 

आपको बता दें किए प्रदेशभर के कई शहरों में चल रहे विरोध के बीच बिजली कंपनियों में उपभोक्ताओं के मन में बनी शंकाओं और मीटर में आ रही समस्याओं का निराकरण करने के बजाए हर घर में स्मार्ट मीटर तेजी से लगाने का काम चल रहा था। कई जगहों पर खामियां सामने आईं जिसके चलते विरोध शुरु हो गया। बताया जा रहा था किए इसकी वजह से उनका बिजली खपत था उतना ही हैए लेकिन बिल में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। जिसके बाद कई जगह मीटर जलाकर प्रदर्शन चत किए गए।

-सवाल, जो उठाए जा रहे 

ना केवल कांग्रेस बल्कि अन्य एजेंसियों और जनता की ओर से भी इस मीटर के ऑपरेटिंग सिस्टम को लेकर सवाल खड़े किये जा चुके हैं। इस मीटर का निर्माण करने वाली एजेंसी और उसमें पाकिस्तानी लोगों का हाथ होने की आशंकाएं भी व्यक्त की जा चुकी हैं। आरोप है कि ये मीटर बिजली की खपत पर नजर रखने से ज्यादा लोगों के दूसरी जानकारियों की जासूसी करता है। इस मामले मंे जबलपुर से लेकर भोपाल और दिल्ली तक खूब हंगामा हो चुका है और कई मामलों में मीटर की खामियां उजागर भी हुईं हैं,लेकिन इससे पहले कंपनी ने कभी स्वीकार नहीं किया, जैसा कि अब कर लिया है।

' जन आंदोलन करेंगे, दिल्ली तक जाएंगे

अब,जब ये प्रमाणित हो चुका है कि स्मार्ट मीटर में तकनीकी खामियां हैं तो कंपनियों को घरों में लगे स्मार्ट मीटर को अलग करने की प्रक्रिया शुरु करनी चाहिए। आखिर पब्लिक इन मीटरों पर कैसे विश्वास करे और बिलों का भुगतान क्यों करेगी। ये बड़ा सवाल है और इसका जवाब कंपनियों को हर हाल में देना होगा।

सौरभ शर्मा, अध्यक्ष, नगर कांग्रेस '

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