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मक्का शरीफ हज पर भेजने ठगे 70 लाख, अदालत ने एजेंट ' शमीम-गफ्फार ' को दी दो-दो साल की सजा


गोहलपुर थाने में दर्ज कराई थी शिकायत, जस्टिस रवीन्द्र कुमार धुर्वे की अदालत ने आरोपियों को सुनाई सजा

जबलपुर। हज यात्रियों से धोखाधड़ी कर उनसे करीब सत्तर लाख रुपये हड़प करने वाले दो आरोपियों को अदालत ने दोषी करार दिया है। जस्टिस रवीन्द्र कुमार धुर्वे की अदालत ने आरोपी मोहम्मद शमीम अंसारी व मोहम्मद गफ्फार को दो-दो साल की सजा व एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

फरियादी सरदार हकीम बाबा ने गोहलपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया था वह अपनी पत्नी शमीम बानो, परिवार वालों व अन्य लोगों के साथ हज यात्रा के लिए तैयार थे। जिसके लिए उन्होंने एजेंट मोहम्मद शमीम अंसारी व गफ्फार एजेंट से संपर्क किया।

दोनों हाजियों को मक्का शरीफ हज कराने भेजने का काम करते हैं, जिन्होंने उन्हें विश्वास में लेकर हज के लिये वीजा दिलवाकर हज करवाने के लिए प्रति व्यक्ति 2 लाख 90 हजार रुपये का पैकेज बताया। इसके बाद आरोपी शमीम और गफ्फार ने मोहम्मद अशरद के खाते में लोगों को पैसा जमा करने के लिये कहा. वह खाता नंबर हैदराबाद का था। जिसमें लोगों ने राशि ट्रांसफर कर दी. इतना ही नहीं शमीम और गफ्फार ने उनके पासपोर्ट भी ले लिए थे। इसके बावजूद उन्हें हज में नहीं भेजा गया. इसके बाद हैदराबाद बुलाया गया।

अदालत को बताया गया कि जब पीड़ित हैदराबाद पहुंचे और आरोपी शमीम से वीजा व अन्य कागजात मांगे तो आरोपी आनाकानी करने लगा। इसके बाद वह अरशद के आफिस पहुंचे तो वह बंद मिला। इतना ही नहीं अरशद का पता भी गलत था। उसके बाद 8 अगस्त 2018 को कुरियर से उनके पासपोर्ट उनके घर जबलपुर आ गए। इस प्रकार शमीम व गफ्फार ने 26 लोगों को हज जाने के नाम पर धोखाधड़ी करते हुए 69 लाख 60 हजार रुपये की धोखाधड़ी की।

इस मामले में गोहलपुर पुलिस ने धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया। ट्रायल के बाद कोर्ट ने आरोपी शमीम अंसारी व गफ्फार को दोषी पाया। अदालत के समक्ष एडीपीओं कांता मरावी ने पक्ष रखा।

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