चुनौतियों भरा सफर, फिर भी नहीं मानी हार
हिमांशु की शिक्षा भी सामान्य छात्रों से अलग रही। उनकी शारीरिक स्थिति के कारण स्कूल में उनके लिए विशेष फर्नीचर बनवाया गया थाए ताकि वह आराम से पढ़ाई कर सकें। उनके पिता ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि हिमांशु को अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों की मदद की जरूरत होती थी। स्कूल में यूरिन से बचने के लिए उन्होंने अपने खान-पान को इस तरह से नियंत्रित किया कि उन्हें कक्षा के दौरान इस समस्या का सामना न करना पड़े। जहां अन्य बच्चे पढ़ाई के बाद खेलते-कूदते थेए वहीं हिमांशु के लिए पढऩे के अलावा कोई दूसरा काम नहीं था। वह हर समय किताबों में ही डूबे रहते थे। यही वजह है कि उनकी 10वींए 12वीं और ग्रेजुएशन में अच्छे नंबर आए। 10वीं में 86.75 प्रतिशत, 12वीं में 87.5 प्रतिशत व ग्रेजुएशन में 78 प्रतिशत अंक हासिल करना उनकी लगन का ही परिणाम है।