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5 सालों में रेल पटरियों पर 361 कर्मचारियों की मौत, पमरे में भी 19 जानें गईं

नई दिल्ली/ जबलपुर. रेल पटरियों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर जानकारी सामने आई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव नेराज्यसभा में बताया कि पिछले पांच सालों में ड्यूटी के दौरान दुर्घटनाओं में कुल 361 रेलवे कर्मचारियों की मौत हुई है। जिसमें से पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर जोन में 19 कर्मचारियों की कत्र्तव्य निभाते वक्त जानें गई हैं.

मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन मौतों में सबसे अधिक संख्या मध्य रेलवे में 44 दर्ज की गई है। इसके बाद उत्तर रेलवे में 40, उत्तर-मध्य रेलवे में 31, पूर्व-मध्य रेलवे में 30, दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे और उत्तर-पश्चिम रेलवे में 24-24, तथा दक्षिणी रेलवे में 20 मौतें हुई हैं।

वही पश्चिम-मध्य रेलवे, पश्चिम रेलवे और पूर्वी तट रेलवे में 19-19 मौतों का आंकड़ा सामने आया है। पूर्वी रेलवे में 23, दक्षिण-मध्य रेलवे में 18, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में 16, दक्षिण-पूर्व रेलवे में 15, उत्तर-पूर्व रेलवे में 13 और दक्षिण-पश्चिम रेलवे में 6 मौतें दर्ज की गईं।

तेज रफ्तार ट्रेनों की चपेट में आने से हुईं मौतें

 रेल मंत्री ने इन बड़ी संख्या में हुई मौतों का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि कम ध्वनि, ट्रेनों की बढ़ी हुई गति और पटरियों के घुमाव के कारण ट्रैकमैन और चाबी वाले अक्सर ट्रेनों की चपेट में आ जाते हैं।

ट्रेकमैनों की सेफ्टी के लिए ये उपाय किये

वर्तमान में, दुर्घटनाएं रोकने के लिए ट्रैकमैनों को चमकदार जैकेट, सुरक्षा हेलमेट, माइनर लाइट, ट्राई-कलर टॉर्च, सुरक्षा जूते, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव, उच्च दृश्यता जैकेट और हल्के वजन वाले उन्नत उपकरण भी दिए जाते हैं। इन तमाम उपायों के बावजूद, ट्रैकमैनों के पटरी पर मौतों का सिलसिला चिंता का विषय बना हुआ है।

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