ऐसे होती है गोटमार मेले की शुरुआत-
जाम नदी में चंडी माता की पूजा की जाती है। सावरगांव के लोग पलाश का पेड़ काटकर लाते हैं और नदी के बीच में लगाते हैं। इस झंडे ;पेड़द्ध को जंगल से लाने की परंपरा पीढिय़ों से सावरगांव निवासी सुरेश कावले का परिवार निभाता आया है। झंडा लगाने के बाद पांढुर्णा और सावरगांव के लोगों के बीच पत्थरबाजी होती है। सावरगांव के लोग पलाश का पेड़ और झंडा नहीं निकालने देते। वे इसे लड़की मानकर रक्षा करते हैं। पांढुर्णा के लोगों को लड़के वाला मानते हैं। पांढुर्णा के लोग पत्थरबाजी कर पलाश का पेड़ कब्जे में लेने का प्रयास करते हैं। अंत में झंडे को तोड़ लेने के बाद दोनों पक्ष मिलकर चंडी माता की पूजा कर गोटमार को खत्म करते हैं।
घायलों के इलाज करने 6 अस्थायी स्वास्थ्य केन्द्र बनाए-
प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर घायलों के इलाज के लिए 6 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए हैंए इनमें 58 डॉक्टर और 200 मेडिकल स्टाफ तैनात है। सुरक्षा के लिहाज से 600 पुलिस जवान तैनात रहे। कलेक्टर अजय देव शर्मा ने धारा 144 भी लागू की। लेकिन इसका असर नहीं दिखा।