गोटमार मेले में पत्थरबाजी से 1000 लोग घायल, किसी का पैर टूटा, किसी का सिर फूटा,

 

पांढुर्णा। मध्यप्रदेश के पांढुर्णा में गोटमार मेले में परंपरा के नाम पर हुई पत्थरबाजी में करीब 1000 लोग घायल हो गए। किसी का हाथ टूट गया, किसी का पैर फ्रैक्चर हो गया। किसी को सिर पर चोट आई तो किसी को चेहरे पर। घायलों में दो की हालत को देखते हुए डाक्टरों ने जांच के बाद नागपुर रेफर किया है। इनमें एक ज्योतिराम उईके का पैर टूट गया है, जबकि निलेश जानराव का कंधा टूटा है। 
                                                           गोटमार परंपरा के तहत जाम नदी किनारे बसे पांढुर्णा और सावरगांव के लोगों ने एक दूसरे पर पत्थर फेंके। नदी के दोनों किनारों पर बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे। सुबह करीब 10 बजे पत्थरबाजी शुरू हुई थी। जो रात करीब 7.30 बजे तक चलती रही। दोनों ओर से किए गए पथराव में एक हजार से ज्यादा लोग घायल हुए, जिससे अफरातफरी मची रही।  पलाश रूपी झंडा नदी में गिरते ही मोटमार खत्म हो गया।

ऐसे होती है गोटमार मेले की शुरुआत-

जाम नदी में चंडी माता की पूजा की जाती है। सावरगांव के लोग पलाश का पेड़ काटकर लाते हैं और नदी के बीच में लगाते हैं। इस झंडे ;पेड़द्ध को जंगल से लाने की परंपरा पीढिय़ों से सावरगांव निवासी सुरेश कावले का परिवार निभाता आया है। झंडा लगाने के बाद पांढुर्णा और सावरगांव के लोगों के बीच पत्थरबाजी होती है। सावरगांव के लोग पलाश का पेड़ और झंडा नहीं निकालने देते। वे इसे लड़की मानकर रक्षा करते हैं। पांढुर्णा के लोगों को लड़के वाला मानते हैं। पांढुर्णा के लोग पत्थरबाजी कर पलाश का पेड़ कब्जे में लेने का प्रयास करते हैं। अंत में झंडे को तोड़ लेने के बाद दोनों पक्ष मिलकर चंडी माता की पूजा कर गोटमार को खत्म करते हैं।

घायलों के इलाज करने 6 अस्थायी स्वास्थ्य केन्द्र बनाए-

प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर घायलों के इलाज के लिए 6 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए हैंए इनमें 58 डॉक्टर और 200 मेडिकल स्टाफ तैनात है। सुरक्षा के लिहाज से 600 पुलिस जवान तैनात रहे। कलेक्टर अजय देव शर्मा ने धारा 144 भी लागू की। लेकिन इसका असर नहीं दिखा। 


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