khabar abhi tak

रिटायर्ड फौजी को सरकारी जमीन अपनी बताकर बेच दी, रुपए वापस मांगने पर पहुंच गए थाना

 


जबलपुर। मझगवां में सेना से सेवानिवृत फौजी देवप्रकाश दुबे को रिखीराम नामक व्यक्ति  सरकारी जमीन को अपना बताकर बेच दिया। 15 साल बाद अब फिर से इसी जमीन पर अपना दावा ठोंक दिया। पीडि़त ने पैसे वापस मांगे तो रिखी राम ने अजाक थाना में मारपीट,जातिसूचक शब्द बोलने व जमीन हड़पने की शिकायत कर दी। मामले में दुबे ने रांझी पुलिस से शिकायत की, जिसपर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। 

                               देवप्रकाश दुबे ने लिखित शिकायत देते हुए पुलिस को बताया कि साल 2014 में उमेश पटेल के माध्यम से उनकी मुलाकात मझगवां निवासी रिखीराम से हुई थी। उसका कहना था कि बच्चे छोटे हैं, मां भी बीमार रहती है, इसलिए जमीन किराए पर देना हैं। मैंने 2024 तक के लिए 7 लाख रुपए में 2 एकड़ जमीन ले ली और खेती करने लगे। 2016 में पता चला कि रिखीराम इसी जमीन को बेच रहा है। मैंने जमीन की कीमत पूछी और 13 लाख में सौदा तय हो गया। रिखीराम को 6 लाख रुपए देकर जमीन के दस्तावेज अपने पास रख लिए। उसने जल्द ही रजिस्ट्री कराने का कहा था। दुबे 2007 में सेना से रिटायर हुए थे। वर्ष  2016 में देव प्रकाश जमीन पर तारों फेसिंग करवा रहे थे। इस दौरान घमापुर निवासी रमेश सोनी पहुंचे और दस्तावेज दिखाते हुए जमीन अपनी बताई। सोनी ने कहा कि 2009 में साढ़े तीन लाख रुपए में रिखी राम व उनकी मां लायची बाई ने यह जमीन हमें बेची है। जिस पर देवप्रकाश ने साढ़े तीन लाख रुपए रमेश को दिए और जमीन के दस्तावेज ले लिए। इसके बाद 2024 तक रिखीराम ने पत्नी, मां व बच्चों की बीमारी का हवाला देकर 9 लाख रुपए और ऐंठ लिए। उससे जब भी रजिस्ट्री का कहा जाता वह रजिस्ट्रार ऑफिस में दस्तावेज जमा होना बताता था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को जमीन खरीदी और पैसे दिए जाने के चेक दिखाए तो पुलिस ने रिखीराम की शिकायत को खारिज कर दिया। देवप्रकाश का कहना है कि दो लोगों को जमीन बेचने के बाद अभी भी रिखीराम यह जमीन शहर से बाहर रहने वाले लोगों को अपना बताकर बेचने की कोशिश कर रहा है।


रोड बनी तो पता चला जमीन सरकारी है- 

पिछले महीनों मझगवां गांव से रिंग रोड स्वीकृत हुआ, शासन ने जांच की तो पता चला कि रिखीराम ने जिस जमीन को अपना बताकर लाखों रुपए में बेचा है वह सरकारी है। रिखीराम के पिता-दादा को खेती कर जीवन यापन करने के लिए दी गई थी। शासकीय जमीन का नाप-जोख करने के लिए जब तहसीलदार, पटवारी पहुंचे तो देवप्रकाश के होश उड़ गए। उन्हें लगा कि अपनी जमीन बताकर रिखीराम ने उसके साथ धोखा किया है और अभी तक 25 लाख रुपए भी ले चुका है।

आरोपी पर हो कड़ी कार्यवाही-

पीडि़त श्री दुबे ने जबलपुर एसपी व रांझी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का कहना है कि रिखीराम ने जमीन की बही के साथ नक्शा व अन्य दस्तावेज देते हुए बताया कि यह जमीन मेरी मां की है जिसे हम बेचना चाहते हैं। इसके एवज में इसने पहले सात लाख रुपए फिर 6 लाख और उसके बाद धीरे-धीरे करते हुए 9 लाख रुपए ले चुका है। उन्होंने बताया कि हमसे पहले 2009 में उसने यह जमीन रमेश सोनी नाम के व्यक्ति को बेची थी, जिसके साढ़े तीन लाख रुपए मैंने सोनी को दिए हैं। इस तरह अभी तक करीब 25 लाख रुपए दे चुका हूं।


Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak