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अमेरिका ने पाकिस्तान से की ऑयल डील, ट्रम्प ने कहा कि तेल के भंडार का करेगें विकास

 

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान के साथ ऑयल डील होने का ऐलान किया है। इसके तहत पाकिस्तान के तेल भंडारों का विकास करेंगे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान भविष्य में भारत को तेल बेच सकता है। 

                               ट्रम्प ने कहा कि पाकिस्तान के साथ एक डील फाइनल की है, जिसमें अमेरिका व पाकिस्तान मिलकर वहां के विशाल तेल भंडारों का विकास करेंगे। एक तेल कंपनी को इस साझेदारी के लिए चुना जाएगा। शायद एक दिन वे भारत को भी तेल बेचें। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ ही घंटे पहले उन्होंने भारत पर टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। पाकिस्तान की समुद्री सीमा में पिछले साल सितंबर में तेल और गैस का एक बड़ा भंडार मिला था। पाकिस्तानी मीडिया हाउस डॉन के मुताबिक इलाके में एक सहयोगी देश के साथ मिलकर 3 साल तक सर्वे किया गया था। इसमें बाद तेल और गैस रिजर्व की मौजूदगी की पुष्टि हुई। खबर है कि यह भंडार दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल और गैस का भंडार होगा। फिलहाल वेनेजुएला में तेल का सबसे बड़ा रिजर्व है, जहां 34 लाख बैरल तेल है। वहीं अमेरिका का सबसे शुद्ध तेल का भंडार है, जिसे अब तक इस्तेमाल नहीं किया गया। 

तेल या गैस को निकालने में लगेंगे 4.5 साल

खबर है कि भंडार से जुड़ी रिसर्च पूरी करने में करीब 42 हजार करोड़ का खर्च आएगा। इसके बाद समुद्र की गहराई से इसे निकालने में 4-5 साल लग सकते हैं। अगर रिसर्च सफल रही तो तेल और गैस को निकालने के लिए कुएं लगाने और बाकी इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में और ज्यादा पैसे की जरूरत होगी। पाकिस्तानी अधिकारियों ने तेल व गैस भंडार मिलने को देश की ब्लू वाटर इकोनॉमी के लिए अच्छा बताया है। समुद्री रास्तों, नए बंदरगाहों और सामुद्रिक नीति (मैरीटाइम पॉलिसी) के जरिए अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना ही ब्लू इकोनॉमी कहलाता है।

पाकिस्तान सरकार ने ट्रम्प को 2026 के नोबेल पीस प्राइज के लिए नामिनेट किया-

पाकिस्तान सरकार ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को 2026 के नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट किया है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ट्रम्प की कूटनीतिक पहल और मध्यस्थता ने एक बड़े युद्ध को टालने में मदद की। पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक बयान के मुताबिकए ट्रम्प ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद दोनों से बात कर संघर्ष विराम में अहम भूमिका निभाई। इससे दो न्यूक्लियर पावर वाले देशों के बीच युद्ध की आशंका टल गई।


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