जबलपुर। दीवाली पर्व के उल्लास में शहर के बाजारों की रौनक जहां चरम पर है, वहीं नगर निगम प्रशासन के अतिक्रमण निरोधी दस्ते की बेरुखी ने आम नागरिकों के लिए गंभीर समस्या खड़ी कर दी है। फल, फूल, मिठाई, मेवा, पूजन सामग्री तथा सजावटी सामान के विक्रेताओं ने फुटपाथ से लेकर मुख्य सड़कों के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। टेबल, तिरपाल और अस्थाई स्टॉल लगाकर कारोबार किए जाने से पैदल चलने वाले राहगीरों को मजबूरन व्यस्त रास्तों पर उतरना पड़ रहा है, जिससे हर तरफ भीषण जाम लग रहा है। नगर निगम के अधिकारियों और अतिक्रमण अमले की भूमिका पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। पर्व पूर्व बाजारों की व्यवस्था चाक-चौबंद करने तथा आवागमन सुगम बनाए रखने का मुख्य दायित्व नगर निगम का ही है, मगर जमीनी स्तर पर अमले की कोई सक्रियता नजर नहीं आ रही। स्थिति यह बन गई है कि पैदल चलने वालों के हक के फुटपाथ अवैध बाजार में तब्दील हो चुके हैं और आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो रहा है।
सड़कों पर पैदल चलना भी हुआ दूभर
शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों की सीमा लांघते हुए फुटपाथों को अपनी निजी जागीर बना लिया है। सड़क किनारे मिठाई और मौसमी फलों की दुकानें सजने से वाहन चालकों के लिए मार्ग बेहद संकरा हो गया है। पैदल चलने के लिए बनाए गए पाथवे पर सामान की बोरियां और प्रदर्शनी काउंटर रखे जाने के कारण वृद्ध, महिलाएं और बच्चे जान जोखिम में डालकर वाहनों के बीच चलने को विवश हैं। इस अव्यवस्था से दुर्घटनाओं की आशंका निरंतर बढ़ रही है।
कागजों तक सीमित रह गई निगम की कार्रवाई
सामान्य दिनों में छोटे-मोटे वेंडरों पर शिकंजा कसने वाला नगर निगम का अमला त्योहार के समय पूरी तरह चुप्पी साधे बैठा है। पक्के व्यापारियों और अस्थाई स्टॉल लगाने वालों द्वारा किए गए इस अतिक्रमण पर कोई वैधानिक प्रक्रिया अमल में नहीं लाई जा रही। न तो दुकानों की सीमाएं तय की जा रही हैं और न ही सार्वजनिक स्थलों पर अवैध कारोबार करने वालों से कोई जवाब-तलब हो रहा है। निरीक्षण के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी होने से सड़क किनारे मनमानी करने वालों के हौसले लगातार बुलंद हैं।
प्रतिदिन सघन निगरानी से ही सुधरेंगे शहर के हालात
बाजारों को सुचारू रखने के लिए नगर निगम प्रशासन को प्रत्येक बाजार क्षेत्र में विशेष निगरानी दल तैनात करने की सख्त दरकार है। सार्वजनिक आवागमन को बाधित करने वाले दुकानदारों की हदबंदी तत्काल तय की जानी चाहिए। बार-बार चेतावनी के बाद भी फुटपाथ न छोड़ने वाले कारोबारियों पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने और सामग्री जब्त करने की सख्त नीति लागू करनी होगी। तभी त्योहार के दौरान आम जनता को सुरक्षित मार्ग और सुगम यातायात की सुविधा वास्तविक रूप से मिल सकेगी।
