जबलपुर। शहर के घनश्याम कुमार यादव और बबीता देवी के पक्ष में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषन आयोग क्रमांक 2 ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अध्यक्ष पंकज यादव तथा सदस्य अमित सिंह तिवारी और सोनल पंडित की संयुक्त पीठ ने यह व्यवस्था दी कि ऋण राशि का वास्तविक भुगतान किए बिना उपभोक्ता के बचत खाते से किस्त वसूलना सीधे तौर पर सेवा में भारी कमी और अनुचित व्यापार प्रथा है। आयोग ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को आदेश दिया है कि वह वसूली गई कुल 1,57,059 रुपये की राशि 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दोनों उपभोक्ताओं को वापस करे। साथ ही बैंक को मानसिक प्रताड़ना के एवज में 15,000 रुपये और परिवाद व्यय के रूप में 3,000 रुपये का हर्जाना चुकाना पड़ेगा।
कागजात जमा न होने से निरस्त हुआ ड्राफ्ट
अधिवक्ता अरुण जैन ने आयोग के समक्ष पक्ष रखते हुए बताया कि परिवादी पक्ष ने दिसंबर 2022 में मकान खरीदने के लिए 25 लाख रुपये का गृह ऋण स्वीकृत कराया था। बैंक प्रबंधन ने औपचारिकता पूरी करते हुए राशि ऋण खाते में डालकर विक्रेताओं के नाम से डिमांड ड्राफ्ट बना लिया। इसके बाद मूल विक्रय विलेख और संपत्ति से जुड़े अन्य दस्तावेज प्रस्तुत नहीं होने के कारण बैंक ने वह ड्राफ्ट अपने पास ही रोक कर रख लिया। संपत्ति की रजिस्ट्री न हो पाने की स्थिति में पीड़ितों ने औपचारिक आवेदन देकर अगस्त 2023 में लोन खाता बंद करवा दिया और ड्राफ्ट भी निरस्त करा दिया गया।
60 दिनों के भीतर पूरा करना होगा भुगतान
लोन रद्द होने के बाद भी बैंक ने उपभोक्ताओं के बचत खाते से 6 अलग-अलग बार में कुल 1,57,059 रुपये की ईएमआई काट ली। बैंक का यह तर्क था कि खाताधारकों द्वारा हस्ताक्षरित सहमति पत्र के आधार पर ही नियमानुसार किस्त की कटौती की गई थी। पीठ ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक पैसे का वितरण उपभोक्ता को नहीं हुआ, तब तक बैंक वसूली नहीं कर सकता। आयोग ने बैंक को निर्देशित समस्त राशि का भुगतान 60 दिनों की तय समयसीमा में करने के आदेश जारी किए हैं।
