पश्चिम मध्य रेल के जबलपुर रेल मंडल में वाणिज्य शाखा में पदस्थ मुख्य वाणिज्य निरीक्षक श्री सूर्य प्रकाश खरे एवं श्री शैलेन्द्र उइके ने साहस, धैर्य, आत्मविश्वास और प्रकृति के प्रति समर्पण भरे अद्भुत अनुभव के साथ उक्त ग्लेशियर पर पहुंचकर रेलवे के प्रथम पर्वतारोही होने का गौरव प्राप्त किया है। उक्त दोनों पर्वतारोही जबलपुर से रेल मार्ग से यात्रा प्रारंभ कर हल्द्वानी होते हुए भीमताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर और खाती गाँव तक पहुँचे। जिसके बाद हिमालय की गोद में वास्तविक ट्रेक प्रारंभ हुआ इस अवसर पर जबलपुर रेल मंडल की इस टीम के साथ ही मध्य रेल मुंबई तथा पश्चिम रेल मुंबई सेन्ट्रल की टीम के सदस्यों ने भी ग्लेशियर की चढाई प्रारंभ की।
उल्लेखनीय है कि पिंडारी ग्लेशियर कुमाऊँ हिमालय के प्रमुख हिमनंदों में से एक है। इसके निकट नंदा देवी, नंदा कोट, पंवलीड्वार एवं अन्य हिमालयी चोटियाँ अपनी भव्यता का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं। यहीं से निकलने वाली पिंडर नदी जो कि अविरल कलकल करती, इठलाती हुई आगे चलकर कर्णप्रयाग में अलकनंदा नदी से मिलती है और गंगा की विशाल जलधारा का हिस्सा बनती है।
रेलवे के दोनों पर्वातारोही सूर्य प्रकाश खरे एवं शैलेन्द्र उइके ने यात्रा के कष्टों के विषय में बताया कि यात्रा के दौरान लगभग छह दिनों तक मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं रहा, जिससे आधुनिक जीवन की आपाधापी से दूर प्रकृति के सान्निध्य में समय बिताने का अवसर मिला। हिमालय की शांत वादियाँ, तारों से भरा आकाश और बर्फीली हवाओं के बीच बिताए गए अविस्मरणीय क्षणों को भुलाया नहीं जा सकता। इन्होंने बताया कि अब जल्द ही एक अन्य हिम शिखर पर ट्रेकिंग की योजना बनायीं जा रही है जिसमे रेलवे का बड़ा दल शामिल होगा। उक्त दल के वापस लौटने पर वाणिज्य शाखा में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री शशांक गुप्ता, सहायक वाणिज्य प्रबंधक श्री गुन्नार सिंह, श्री धर्मेन्द्र सिंह, मुख्य वाणिज्य निरीक्षक रवि शर्मा, पवन नेमा, सादिक खान, धनंजय तिवारी, नीरज पाठक, एल सी केशरवानी, निशित खुराना, सौरभ खरे, मनीष सरकले, मनीष कश्यप, कुलदीप सिंह,शिव प्रसाद पाटिल, रोहित सिंह आदि ने दोनों का स्वागत करते हुए सफल यात्रा कि बधाई दी।

