जबलपुर। कटंगी क्षेत्र में 5 वर्षीय बच्ची को रेफर करते समय एंबुलेंस का टायर फटने और दूसरी गाड़ी समय पर न आने से स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई है। इस गंभीर लापरवाही पर पुलिस ने ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जबलपुर जिले में संचालित हो रहे सभी सरकारी और गैर-सरकारी आपातकालीन वाहनों की वास्तविक स्थिति अब जांच के दायरे में है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ नवीन कोठारी के अनुसार स्वास्थ्य महकमा अब निजी वाहनों का भी पूरा डाटा जुटा रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों के दस्तावेज, तकनीकी हालत और जीवनरक्षक प्रणालियों की गड़बड़ी को समय रहते पकड़ना है ताकि मरीजों की जान जोखिम में न पड़े।
खराब रखरखाव से मरीजों की जान सांसत में
आपातकालीन वाहनों का सही समय पर दुरुस्त रहना बेहद जरूरी है। इसके लिए प्रत्येक वाहन का वैध बीमा, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल प्रमाण पत्र और फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से देखा जाएगा। पहियों की ग्रिप, ब्रेक की कार्यप्रणाली, स्टेयरिंग और नियमित सर्विसिंग का इतिहास भी जांचा जाएगा। इसके अलावा गाड़ी के भीतर मरीज को मिलने वाली सुविधाओं की पड़ताल होगी। इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर का प्रेशर, वेंटिलेटर, पोर्टेबल स्ट्रेचर, प्राथमिक उपचार किट और जरूरी दवाइयों का स्टॉक शामिल है। गाड़ियों में तैनात पैरामेडिकल स्टाफ की तकनीकी दक्षता, उनके प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ियों का अस्पतालों के साथ हुआ अनुबंध भी देखा जाना तय हुआ है।
दस्तावेजों में दर्ज दावे जमीनी हकीकत से दूर
मध्य प्रदेश भर में संजीवनी 108 सेवा के अंतर्गत कुल 1002 एंबुलेंस चलाई जा रही हैं। इनमें गंभीर मरीजों के लिए 167 एडवांस लाइफ सपोर्ट और सामान्य स्थिति के लिए 835 बेसिक लाइफ सपोर्ट वाहन उपलब्ध हैं। तय मानकों के अनुसार गांवों में जरूरतमंद तक पहुंचने का रिस्पांस टाइम 25 मिनट और शहरों के लिए 18 मिनट निर्धारित किया गया है। कटंगी की हालिया घटना यह स्पष्ट करती है कि कागजों पर मौजूद आंकड़े और सड़कों की हकीकत में भारी अंतर है। जब तक हर वाहन का औचक निरीक्षण नहीं होगा और लापरवाह ऑपरेटरों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक आपातकालीन व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकती।
