जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रतिनिधिमंडल ने उद्योग भवन पहुंचकर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के कार्यकारी संचालक अनिल राठौर से मुलाकात की। इस दौरान मंच के सदस्यों डॉ. पीजी नाजपांडे, एडवोकेट वेदप्रकाश अधोलिया, अशोक यादव, यशवंत कोष्टा, पीएस राजपूत, डीआर लखेरा और राममिलन शर्मा ने शहर में निर्यात सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई। केंद्र सरकार की योजना में प्रदेश के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और नर्मदापुरम को शामिल करने के बावजूद जबलपुर की उपेक्षा का विषय प्रमुखता से उठाया गया। चर्चा के बाद अनिल राठौर ने स्वीकार किया कि निर्यात केंद्र के बिना स्थानीय कारोबार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जबलपुर में नया केंद्र खोलने के लिए मध्य प्रदेश सरकार को तत्काल अनुशंसा भेजी जाएगी।
मध्य प्रदेश सरकार को तुरंत भेजी जाएगी अनुशंसा
प्रतिनिधिमंडल ने ध्यान दिलाया कि हरा मटर और होल मिल्क के उत्पादन तथा आपूर्ति में यह जिला प्रदेश भर में नंबर 1 स्थान रखता है। इसके साथ ही स्टोन क्राफ्ट और आयुध निर्माण से जुड़े रक्षा उत्पादों का भी बड़े पैमाने पर बाहरी बाजारों में विपणन किया जाता है। बुनियादी ढांचे की कमी से शहर के प्राकृतिक और औद्योगिक हुनर को अपेक्षित मंच नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय स्तर पर संकुल न बनने के कारण उत्पादन होने के बाद भी कारोबारियों को भारी अतिरिक्त लागत और कागजी औपचारिकताओं से जूझना पड़ता है।
व्यापारिक कॉरिडोर के पूर्ण लाभ से वंचित शहर
राजधानी भोपाल में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान इंदौर, भोपाल और जबलपुर के मध्य इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की कार्ययोजना स्वीकृत की गई है। मंच ने स्पष्ट किया कि जब तक शहर में स्वतंत्र निकासी और जांच तंत्र नहीं होगा, तब तक इस कॉरिडोर का वास्तविक लाभ मालवा क्षेत्र की तुलना में संस्कारधानी को बहुत कम मिलेगा। आधुनिक केंद्र के अभाव में नए निवेशक अपनी इकाइयां लगाने से बच रहे हैं। यदि शासन स्तर से इस मांग पर त्वरित फैसला होता है, तो महाकोशल अंचल में औद्योगिक निवेश का नया मार्ग प्रशस्त होगा और स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सीधी पहुंच प्राप्त हो सकेगी।
