नई दिल्ली। रेलवे में सीधी भर्ती के लिए रिक्तियों के आकलन की प्रक्रिया अब और व्यापक होने जा रही है। लोको रनिंग स्टाफ (लोको पायलट) और ट्रेन मैनेजर (गार्ड) के पदों पर भर्ती की जरूरत तय करते समय भविष्य में होने वाले पदों की संभावित बढ़ोतरी का भी हिसाब रखा जाएगा। साथ ही इंटर रेलवे रिक्वेस्ट ट्रांसफर (आइआरआरटी) के लिए जारी नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) को भी रिक्तियों की गणना में शामिल किया जाएगा।
रेलवे बोर्ड ने ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (एचआरएमएस) के इंडेंट मैनेजमेंट माड्यूल में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था 2027 के वार्षिक भर्ती कैलेंडर से लागू होगी।
रेलवे बोर्ड के निदेशक (एमपीपी) अमित सिंह मेहरा की ओर से पांच अक्टूबर, 2026 को जारी पत्र के अनुसार, लोको रनिंग स्टाफ व ट्रेन मैनेजर के लिए रिक्तियों का आकलन करते समय पिछले दो वर्षों में संबंधित डिवीजन या यूनिट में बनाए गए पदों की औसत संख्या की सीधी भर्ती कोटे वाले हिस्से को भी देखा जाएगा। इस औसत को अगले एक वर्ष में संभावित पद वृद्धि मानते हुए रिक्तियों में स्वत: जोड़ा जा सकेगा। इससे भर्ती प्रक्रिया में भविष्य की मानव संसाधन जरूरत को पहले से शामिल करने का रास्ता साफ होगा। रेलवे कर्मचारियों के इंटर रेलवे रिक्वेस्ट ट्रांसफर के लिए प्राप्त एनओसी का भी सीधा असर रिक्तियों की गणना पर पड़ेगा।
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इन प्रावधानों को एचआरएमएस इंडेंट मैनेजमेंट माड्यूल में शामिल करने के लिए आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। इन बदलावों को जोन या यूनिट स्तर से संपादित नहीं किया जा सकेगा। यानी, रिक्तियों की गणना में भविष्य के क्रू रिव्यू और आइआरआरटी एनओसी के आधार पर होने वाला समायोजन निर्धारित प्रणाली के अनुसार ही होगा।
