जबलपुर। समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए चल रहे ऑनलाइन किसान पंजीयन में तकनीकी खामियों ने अन्नदाताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आज 10 अक्टूबर अंतिम तारीख तय होने के बावजूद सर्वर की गड़बड़ी से प्रक्रिया ठप पड़ी है। गोसलपुर क्षेत्र के किसान राकेश चौरसिया, दीपक पटेल, दिलीप पटेल और मधुसूदन पटेल सहित किसान संघ के शैलेष पटेल ने बताया कि गिरदावरी पूरी होने पर भी पोर्टल पर प्रक्रिया लंबित दिख रही है। फार्मर आईडी बनने के बाद खसरे नहीं दिख रहे हैं या लिंक होने के बाद दोबारा जांच में स्वतः गायब हो रहे हैं। लैंड डाटा फेच न होने से वास्तविक रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो पा रहे हैं। तय तिथि तक समाधान न होने पर बड़ी संख्या में काश्तकार सरकारी खरीद से वंचित रह जाएंगे।
तकनीकी खामियों से खसरा और लैंड डाटा गायब
तहसील और ग्रामीण अंचलों में बने सेवा केंद्रों पर किसान सुबह से शाम तक कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। पोर्टल पर जमीन का पूर्ण विवरण दर्ज होने के बावजूद सॉफ्टवेयर की विफलता के चलते सर्वर डेटा स्वीकार नहीं कर रहा है। कई मामलों में किसानों के वैध खसरा नंबर अचानक पोर्टल से विलोपित हो रहे हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया शून्य हो जाती है। पटवारी स्तर से गिरदावरी का भौतिक सत्यापन पूर्ण होने के बाद भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम अधूरा दिखने से किसान असमंजस में हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी और केंद्रीय सॉफ्टवेयर के बीच सामंजस्य न होने से अन्य जिलों में भी ऐसे ही गतिरोध बने हुए हैं। राजस्व अभिलेख दुरुस्त होने के बावजूद केवल तकनीकी त्रुटि के कारण किसानों के फॉर्म निरस्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
अंतिम तिथि बढ़ाकर अलग ऑफलाइन रिकॉर्ड बनाए प्रशासन
काश्तकारों की मांग है कि तकनीकी गड़बड़ी का खामियाजा किसानों को भुगतना न पड़े, इसलिए 10 अक्टूबर की समयसीमा में तत्काल विस्तार किया जाए। इसके अलावा जिन पात्र किसानों का डेटा पोर्टल पर ऑनलाइन नहीं चढ़ पा रहा है, उनका अलग से भौतिक या ऑफलाइन रिकॉर्ड तैयार कर पंजीयन सुरक्षित किया जाए। तकनीकी टीम लगाकर लैंड डाटा फेचिंग और फार्मर आईडी लिंकिंग की गड़बड़ी को तुरंत ठीक कराया जाए, ताकि कोई भी किसान उपज बेचने से वंचित न रहे।
