जबलपुर। नगर निगम में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की मौजूदा 21 दिन की समय-सीमा को बढ़ाकर 60 से 90 दिन करने की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने निगमायुक्त को ज्ञापन सौंपकर जनहित में तुरंत राहत देने का अनुरोध किया। इस ज्ञापन को सौंपने वालों में प्रमुख रूप से अधिवक्ता नितिन बावरिया, उदित पिल्ले, अमरदीप सग्गू, सतीश नेतन राव और रंजीत चौधरी सहित कई अन्य विधि विशेषज्ञ शामिल रहे। वकीलों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान 21 दिनों की छोटी अवधि आम नागरिकों के लिए भारी मानसिक तनाव और दफ्तरों की जटिल कागजी दौड़ का सबब बन चुकी है, जिसे तत्काल सुधारा जाए।
अल्प मियाद बीतते ही एसडीएम दफ्तर के चक्कर
मौजूदा नियमों के तहत यदि कोई परिजन निर्धारित 21 दिनों के भीतर आवेदन पूरा नहीं कर पाता, तो उसे बाद में प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए सब डिविजनल मजिस्ट्रेट कार्यालय से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। इस जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया में न केवल बेवजह समय नष्ट होता है, बल्कि सामान्य जनता को बेवजह तहसीलों के फेरे लगाने पड़ते हैं। छोटी सी चूक के बाद कानूनी कागजात तैयार करवाने और दफ्तर-दर-दफ्तर भटकने से आम आदमी को भारी आर्थिक और शारीरिक परेशानियों से जूझना पड़ता है।
शोक संतप्त परिवारों को मिले मानवीय राहत
घर के किसी सदस्य अथवा जवान बेटा-बेटी की असामयिक मृत्यु के बाद परिजन गहरे सदमे, क्रियाकर्म और सामाजिक दायित्वों में उलझे रहते हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में 21 दिन की भागमभाग में दस्तावेज जुटाना बेहद कठिन साबित होता है। वकीलों ने नगर निगम आयुक्त के समक्ष तर्क रखा कि व्यावहारिक व मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखकर समय-सीमा का विस्तार किया जाना बेहद आवश्यक है।
