भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं सिद्धार्थ नालंदा का आरोप है कि पूर्व प्राचार्य रामसखा वर्मा (कोरी) सेवानिवृत्त हुए थे। उनके रिटायर होते ही नए प्रभारी प्राचार्य रामसखेंद्र द्विवेदी ने पदभार संभालने से पहले कथित तौर पर गौमूत्र और गंगाजल से कक्ष का शुद्धिकरण कराया। संगठन ने इसे दलित समाज का अपमान बताते हुए प्राचार्य पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। प्राचार्य कक्ष के भीतर मां सरस्वती की तस्वीर रखी है और प्रभारी प्राचार्य रामसखेंद्र द्विवेदी पूजा करते हुए जल छिड़का गया। नए प्राचार्य ने कहा कि उन्होंने सिर्फ पूजा का जल छिड़का था। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही तहसीलदार रोशनलाल रावत मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर स्थिति को संभाला। मामले पर अपना पक्ष रखते हुए प्रभारी प्राचार्य रामसखेंद्र द्विवेदी ने सभी आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया। उन्होंने कहा 30 सितंबर को पूर्व प्राचार्य का पूरे सम्मान के साथ विदाई समारोह संपन्न हुआ था और उन्होंने मुझे प्रभार सौंपा था। 5 अक्टूबर के दिन विद्यालय आने पर स्टाफ ने पदभार ग्रहण के उपलक्ष्य में स्वागत कार्यक्रम रखा था। हमने मां सरस्वती की प्रतिमा रखकर सामान्य पूजा-अर्चना की थी। पूजा के दौरान जो जल अर्पित किया गया था, उसी पवित्र जल का छींटा दिया गया था। किसी तरह के शुद्धिकरण या भेदभाव का आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत और गलत है।
तहसीलदार ने लिया ज्ञापन, जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन-
तहसीलदार रोशनलाल रावत ने बताया कि भीम आर्मी द्वारा स्कूल के बाहर धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा गया है। पूरे घटनाक्रम और वीडियो की प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार उचित वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।