जबलपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महाकौशल प्रांत के तत्वावधान में स्थानीय श्रीराम इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में आयोजित 3 दिवसीय महाविद्यालयीन विद्यार्थी शिविर के समापन अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने युवाओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में युवाओं का योगदान विषय पर बोलते हुए स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर निष्ठा, लगन और नैतिक मूल्यों के साथ कार्य करने से ही देश का वास्तविक उत्थान संभव है। डॉ. भागवत ने कहा कि केवल कोरी कल्पनाओं के सहारे आगे नहीं बढ़ा जा सकता, बल्कि इसके लिए समृद्ध, कल्याणकारी और स्वच्छ सोच को आत्मसात करते हुए एकाग्रचित्त होकर अध्ययन करना बेहद आवश्यक है।
सच्ची सेवा के लिए आत्मसंयम पहली आवश्यकता
डॉ. भागवत ने जीवन में संयम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने शरीर, मन और वाणी पर पूर्ण नियंत्रण रखना चाहिए। मन की चंचलता को दूर रखकर और परिणाम की चिंता किए बिना सत्य के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहना ही देश निर्माण में सबसे बड़ी भागीदारी सिद्ध होता है। हिंदुत्व के मूल स्वरूप को विस्तार से समझाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म समग्र मानवता का प्रतीक है और यह समाज को परस्पर एकता तथा विविधताओं को खुले दिल से स्वीकार करने का संदेश देता है। यह सनातन जीवन पद्धति पूरी तरह प्रकृति के नियमों से जुड़ी है, जो संपूर्ण मानव जाति के स्वाभाविक कल्याण के लिए सर्वथा उपयुक्त और प्रासंगिक मानी गई है।
प्रलोभन और धर्मांतरण के विरुद्ध सजगता जरूरी
शिविर के दौरान विशेष जिज्ञासा समाधान सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें उन्होंने छात्रों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दिया। इस संवाद के दौरान व्यक्ति निर्माण, संगठन की कार्यशैली, दैनिक समय प्रबंधन, छात्र आंदोलन और आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग जैसे विषयों पर गंभीर मंथन हुआ। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने भीतर दैवीय गुणों को विकसित कर कठिन आदर्शों पर अडिग रहने की अपील की। सामाजिक चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने धर्मांतरण और लव जिहाद जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए जन-जागरण को अनिवार्य बताया। उन्होंने सचेत किया कि किसी भी तरह के बहकावे अथवा प्रलोभन में आए बिना समाज को अपनी जड़ों और मानवीय मूल्यों के प्रति दृढ़ रहना होगा।
