जबलपुर। जिले के बरगी मेन गांव की निवासी 80 वर्षीय शांति बाई भूमिया अपने बेटे संतोष और बहू विनीता के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने अपनी सामाजिक सुरक्षा पेंशन रुकने की शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया। पिछले 9 महीनों से उन्हें हर माह मिलने वाली 600 रुपये की सरकारी सहायता राशि प्राप्त नहीं हुई है। वृद्ध महिला लाठी के सहारे जिला मुख्यालय तक पहुंची थीं। उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासनिक अधिकारी उनकी परेशानी सुनकर राहत देंगे। इसके बावजूद कलेक्ट्रेट परिसर में उनकी मुलाकात किसी भी जिम्मेदार अधिकारी अथवा संबंधित कर्मचारी से नहीं हो पाई। बुजुर्ग महिला को बिना अपनी बात रखे ही अपने परिवार के साथ वापस लौटना पड़ा।
पंचायत सचिव ने खाते में गड़बड़ी की बात कही
पीड़ित परिवार ने बताया कि गांव के सचिव से संपर्क करने पर पेंशन की रकम किसी अन्य बैंक खाते में जाने की बात कही गई। इस बात की पुष्टि केवल बैंक खाते और भुगतान रिकॉर्ड की जांच से ही संभव है। शांति बाई के नाम से स्वीकृत सरकारी सहायता का पैसा वास्तव में किस व्यक्ति के खाते में जा रहा है, इसका खुलासा अब तक नहीं हुआ।
दवाइयों के खर्च पर पड़ा सीधा भारी असर
परिवार का जीवन यापन दैनिक मजदूरी से चलता है। काम नियमित न मिलने से घर में पैसों की तंगी बनी रहती है। मासिक पेंशन बंद होने से वृद्ध महिला के नियमित इलाज और दवाओं का प्रबंध करना कठिन हो गया है। इस व्यवस्था के तहत पंचायत स्तर और सामाजिक न्याय विभाग को यह जांचना होगा कि भुगतान में त्रुटि कहां हुई और बकाया राशि कब तक जारी की जाएगी।
