विश्व हिंदू महासंघ के प्रदेश युवा अध्यक्ष विकास कुमार खरे ने इस मुहिम के पीछे का उद्देश्य श्रद्धालुओं को दुकानदारों की धार्मिक पहचान से अवगत कराना बताया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि मेले में कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर कारोबार कर रहे हैं, जिससे कथित तौर पर 'लव जिहाद' जैसी गतिविधियों की आशंका रहती है। संगठन ने यह भी मांग की है कि भविष्य में मंदिर परिसर में दुकानों का आवंटन करते समय दुकानदारों की धार्मिक पहचान का विशेष ध्यान रखा जाए। इस मामले पर हनुमानताल थाना प्रभारी सुभाषचंद्र बघेल का कहना है कि नर्मदा मैदान का क्षेत्र नगर निगम के अंतर्गत आता है। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी एसडीएम और नगर निगम के अधिकारियों को पत्र के माध्यम से दे दी गई है। प्रशासन का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद ही आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, जबलपुर के भानतलैया स्थित बड़ी खेरमाई मंदिर का इतिहास लगभग 800 वर्ष पुराना और कल्चुरी काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि गोंड राजा मदनशाह और संग्रामशाह के समय से ही इस स्थान पर माता की असीम आस्था रही है। हाल ही में इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर पत्थरों की विशेष लॉकिंग प्रणाली से किया गया है, जिसमें लोहे का उपयोग नहीं किया गया है।
मुस्लिम दुकानदारों की प्रतिक्रिया-
इस मुहिम के सामने आने के बाद मेले में दुकान लगाने वाले मुस्लिम दुकानदारों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से इस मेले में अपनी दुकानें लगाते आ रहे हैं, लेकिन पहले कभी इस तरह का विवाद या भेदभाव देखने को नहीं मिला था।