पिता की याचिका पर शीर्ष अदालत का सख्त फैसला
जबलपुर। मध्य प्रदेश के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में देश की शीर्ष अदालत ने भोपाल की जिला अदालत में चल रही पूरी न्यायिक सुनवाई पर अगले आदेश तक प्रभावी रोक लगा दी है। मृतका के पिता नवनीधि शर्मा ने मध्य प्रदेश से बाहर दिल्ली की सक्षम अदालत में मुकदमा स्थानांतरित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस अहम ट्रांसफर पिटीशन पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो सहित आरोपित पक्ष को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में विस्तृत जवाब तलब किया है। उधर, दूसरी ओर जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आरोपित पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत अर्जी पर निर्धारित सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 तक आगे बढ़ा दी गई है।
दिल्ली शिफ्ट करने की मांग पर नोटिस जारी
याचिकाकर्ता नवनीधि शर्मा ने देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष यह गंभीर दलील प्रस्तुत की कि मामले में मुख्य आरोपित महिला गिरिबाला सिंह पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश के प्रभावशील न्यायिक पद पर लंबे समय तक आसीन रही हैं। स्थानीय स्तर पर उनके पुराने प्रशासनिक प्रभाव और विधिक संबंधों के कारण भोपाल की ट्रायल कोर्ट में स्वतंत्र, पारदर्शी एवं निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने की प्रबल आशंका बनी हुई है। निष्पक्ष न्याय की रक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही प्रकरण को राजधानी दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करना अनिवार्य बताया गया। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसफर अर्जी पर अंतिम निर्णय आने तक स्थानीय अदालत में लंबित सभी अदालती कार्यवाहियों को पूरी तरह स्थगित रखने का आदेश पारित किया है। इस बहुचर्चित प्रकरण में मृतका के पति समर्थ सिंह तथा सास गिरिबाला सिंह दोनों ही गंभीर आरोपों के तहत सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो इस पूरे मामले की विभिन्न आपराधिक पहलुओं पर बारीकी से विस्तृत विवेचना कर रही है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पहले भी अनेक पीठों द्वारा व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए सुनवाई से स्वयं को अलग किया जा चुका था। अब 26 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर बहस होगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवादियों के जवाब दाखिल होने के बाद ट्रांसफर याचिका पर अंतिम सुनवाई की दिशा तय की जाएगी।
