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जबलपुर: ईंधन की कमी से सफाई व्यवस्था ध्वस्त, जनता झेल रही दुर्गंध



जबलपुर।  नगर निगम में ईंधन संकट के चलते लगातार तीसरे दिन गुरुवार को भी सफाई कार्य पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सका है, जिससे कॉलोनियों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। मंगलवार से उपजा यह व्यवधान आज भी जारी रहने से व्यवस्था सुधारने में अमला जुटा हुआ है। जिन वाहनों को 10 लीटर ईंधन चाहिए था, उन्हें महज 2 से 3 लीटर ही थमाया गया। नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा ने शहर सत्ता को घेरते हुए कहा कि कई इलाकों में बीते 3 दिनों से कचरा गाड़ियां नहीं पहुंची हैं, जिससे त्योहार पर निकला अपशिष्ट घरों में अटका पड़ा है। वहीं महापौर जगत बहादुर सिंह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि खाते में 87 करोड़ रुपए की पर्याप्त राशि मौजूद है, अवकाशों की वजह से आपूर्ति प्रक्रिया में अस्थायी रुकावट आई थी जिसे अब अमला सामान्य बनाने में जुटा है।

​शहर के कई वार्डों में पसरी है भारी गंदगी

​वार्डों में सुबह से ट्रिपर गाड़ियां नहीं पहुंचने के कारण सड़कों पर कूड़े के ढेर लग गए हैं। अवकाश के बाद घरों से निकलने वाले अतिरिक्त कचरे का समय पर उठाव न होने से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। कई प्रमुख बाजारों और रिहायशी बस्तियों में दुर्गंध फैलने लगी है। सुबह जब कर्मचारी सीमित ईंधन लेकर निकले तो कुछ ही गलियों का चक्कर काटकर गाड़ियां रास्ते में ही खड़ी करनी पड़ गईं। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि जब तक सभी कंटेनर और डिपो खाली नहीं किए जाते, तब तक संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहेगा। स्वास्थ्य अमले के पास संसाधन होते हुए भी संचालन बाधित दिखाई दे रहा है।

​विशालकाय बेड़े के संचालन में अटका भारी भरकम बजट

​प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार बेड़े में 900 से अधिक अथवा लगभग 960 वाहन शामिल हैं। इनके नियमित भ्रमण के लिए प्रतिदिन लगभग 6 से 7 हजार लीटर ईंधन की खपत होती है। इस मद में हर माह लगभग 2 से ढाई करोड़ रुपए का खर्च आता है। ईंधन कंपनियों से क्रय करने के लिए विभाग को पहले से अग्रिम भुगतान करना अनिवार्य होता है। विपक्ष का तर्क है कि नई मशीनरी और उपकरण जुटाने के फेर में मौजूदा संसाधनों को चलाना कठिन हो रहा है, जिसका सीधा खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।

​अग्रिम भुगतान में तकनीकी रुकावट से बिगड़े थे पूरे हालात

​अधिकारियों का दावा है कि लगातार शासकीय अवकाश पड़ने से वित्तीय स्वीकृति की औपचारिकताएं समय पर पूरी नहीं हो सकी थीं। इसी प्रक्रियागत विलंब के कारण पंपों से नियमित उठाव प्रभावित हुआ। अब संबंधित बैंक और विभागीय शाखाओं के जरिए जरूरी कागजी कार्यवाही निपटा ली गई है। प्रशासनिक दल लगातार निगरानी रख रहा है ताकि हर गाड़ी को उसकी निर्धारित क्षमता के मुताबिक पूरा ईंधन मिल सके। वार्ड स्तर पर बिगड़े शेड्यूल को दुरुस्त करने के लिए अतिरिक्त फेरे लगाने की कार्ययोजना पर काम शुरू किया गया है ताकि अगले कुछ घंटों में हालात सामान्य हो सकें।

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