जबलपुर। भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 की धारा 10 उपधारा 2-सी में किराए पर रोक न लगाने का नियम शामिल होने से उड़ानों की दरों में भारी उछाल दर्ज हुआ है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच जबलपुर के डॉ. पीजी नाजपांडे ने नई दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के लॉ तथा जस्टिस मंत्रालय के लेजिस्लेटिव विभाग के सचिव और डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन को विधिवत आपत्ति भेजी है। संगठन का कहना है कि यह निर्णय जनहित के विरुद्ध है, जिससे विमानन कंपनियों को अंधाधुंध दरें वसूलने की खुली छूट मिली। केंद्र ने 11 दिसंबर 2023 को राज्यसभा प्रश्न 823 के जवाब में मासिक जांच के लिए टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट गठन की बात कही थी, परंतु 11 दिसंबर 2024 को राजपत्र में प्रकाशित नए अधिनियम ने इस इकाई को पूरी तरह निष्प्रभावी बना दिया है।
नियमों की ढील से आसमान छू रहा किराया
साल 2025 की तुलना में वर्ष 2026 में विभिन्न महत्वपूर्ण मार्गों पर हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार हैदराबाद से पटना के टिकट में सर्वाधिक 144.4% की तेजी आई, जहां किराया 9,000 से बढ़कर सीधे 22,000 हो गया। मुंबई से वाराणसी रूट पर 112.3% का इजाफा देखा गया, जहां मूल्य 7,500 से उछलकर 15,926 तक पहुंच गया। इसी प्रकार बेंगलुरु से वाराणसी के बीच दरें 8,500 से बढ़कर 17,698 हो गईं, जो 108.2% की वृद्धि दर्शाती हैं। बेंगलुरु से पटना मार्ग पर टिकट 13,000 के मुकाबले 26,053 पर पहुंच गया, जो ठीक 100.4% की दोहरी बढ़ोत्तरी दर्शाता है।
कानूनी विरोधाभास के चलते आम यात्री परेशान
प्रमुख महानगरों को जोड़ने वाले मार्गों पर भी यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ा है। बेंगलुरु से दिल्ली का हवाई भाड़ा 9,264 से बढ़कर 16,469 हो गया, जो 77.8% अधिक है। मुंबई से पटना के टिकट में 76.4% का उछाल आया, जहां राशि 14,540 से बढ़कर 25,643 दर्ज हुई। मुंबई से दिल्ली मार्ग पर टिकट 8,534 से बढ़कर 11,531 हो चुका है, जिसमें 35.1% की तेजी आई। वहीं दिल्ली से पटना रूट पर 30.4% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसके तहत किराया 11,500 से बढ़कर 19,000 तक पहुंच गया। मंच का तर्क है कि जब सरकार सिविल एविएशन और एयर ट्रांसपोर्ट के आर्थिक प्रबंधन का दायित्व संभालती है, तब किराए को पूरी तरह अनियंत्रित छोड़ देना नीतिगत विसंगति पैदा करता है। इस व्यवस्था से आम जनता का बजट बुरी तरह गड़बड़ा गया है।
