जबलपुर। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई ने आगामी दशहरा, दीपावली और ग्यारस जैसे पर्वों पर मिलावट रोकने के लिए देश के सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फेस्टिव ड्राइव चलाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब मिठाइयों, डेरी उत्पादों, मावा, पनीर और नमकीन जैसी खाद्य दुकानों पर होने वाले छापों, निरीक्षणों, लिए गए नमूनों तथा उनकी जांच रिपोर्ट का पूरा विवरण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। प्राधिकरण ने आदेश दिया है कि फील्ड टीमों को हर कार्यवाही और उसके अंतिम परिणाम का संपूर्ण डाटा अनिवार्य रूप से एफओएससीओओएस और एफओएससीओआरआईएस पोर्टल पर रियल टाइम में अपलोड करना होगा। इससे पुरानी कागजी खानापूर्ति बंद होगी और जनता के सामने स्पष्ट परिणाम आएंगे।
डिजिटल पोर्टल पर अब सीधे दर्ज होगी जांच कार्यवाही
त्योहारों के मौसम में अमूमन यह देखने में आता रहा है कि प्रशासनिक टीमें जांच के नाम पर प्रतिष्ठानों से नमूने एकत्र करके प्रयोगशाला भेज देती हैं, लेकिन आम उपभोक्ताओं को यह कभी पता नहीं चल पाता कि जांच में कौन सा नमूना सही पाया गया और किस मिलावटखोर पर क्या विधिक कार्यवाही हुई। इस बड़ी कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तय किया गया है कि जांच की हर गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड तुरंत तैयार किया जाए। केंद्रीय तंत्र के इस कदम से मैदानी अमले की जवाबदेही तय होगी और गलत रिपोर्टिंग या फर्जी आंकड़ों के सहारे अभियानों की इतिश्री करने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
भोपाल स्थित एकलौती लैब पर निर्भर पूरी व्यवस्था
जबलपुर जिले में खाद्य सुरक्षा प्रशासन के पास करीब 6 खाद्य निरीक्षक तैनात हैं, जिनके कार्यक्षेत्र अलग-अलग बंटे हुए हैं। इन सभी निरीक्षकों को हर महीने अपने-अपने हलकों से लगभग 20-20 सैंपल एकत्र करके अधिकृत प्रयोगशाला में भेजने का दायित्व सौंपा जाता है। राज्य की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पूरे मध्य प्रदेश के 55 जिलों से संकलित सैकड़ों नमूनों की जांच के लिए केवल भोपाल में एकमात्र शासकीय लैब स्थापित है। समूचे सूबे का अत्यधिक बोझ अकेले एक लैब पर होने से नमूनों के रासायनिक परीक्षण की अंतिम रिपोर्ट सामने आने में महीनों का समय बीत जाता है। यही वजह है कि त्योहारों में की जाने वाली त्वरित कार्यवाहियां अक्सर ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। नए पोर्टल नियम के आने से अब समयबद्ध जांच रिपोर्ट मिलना अनिवार्य हो जाएगा।
