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​90 प्रतिशत डीजे बिना अनुमति के मैदान में, एडीएम को सौंपा गया ज्ञापन



जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के तत्वावधान में जनसंगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जबलपुर में अपर जिला मजिस्ट्रेट रविशंकर राय से भेंट कर ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। इस दल में मंच अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, सुभाषचन्द्रा, डीआर लखेरा, गीता पांडे, अशोक यादव, यशवंत कोष्टा, एड. ब्रजेश साहू और राममिलन शर्मा शामिल रहे। मंच ने मांग रखी कि 9 अक्टूबर को जारी प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वाले 90 प्रतिशत बिना अनुमति संचालित डीजे तत्काल जब्त हों और संचालकों पर प्राथमिकी दर्ज की जाए। साथ ही हर क्षेत्र में निगरानी समितियां बनाई जाएं और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रोज डेसिबल स्तर की जांच रिपोर्ट दे। एडीएम ने आश्वस्त किया कि निगरानी दल तत्काल बनेंगे और प्रदूषण बोर्ड से नियमित आंकड़े तलब होंगे।

​बिना अनुमति डीजे संचालन पर जब्ती कार्रवाई होगी तेज

​शहर में दुर्गोत्सव की शुरुआत के साथ ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों की अनियंत्रित आवाज से आम नागरिकों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रशासन द्वारा निर्धारित की गई समय सीमा और नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। अधिकांश आयोजनों में स्वीकृति लिए बिना ही भारी क्षमता वाले साउंड सिस्टम लगाए गए हैं। इन तेज ध्वनियों के कारण रिहायशी इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और छोटे बच्चों को भारी मानसिक तनाव व शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जनसंगठनों ने स्पष्ट किया है कि केवल समझाइश देने के बजाय गैरकानूनी रूप से बज रहे उपकरणों को सीधे तौर पर जब्त कर थाने में खड़ा कराया जाए। नियम तोड़ने वालों पर दंडात्मक धाराएं लगाकर सख्त कानूनी नजीर पेश करना बेहद आवश्यक हो गया है।

​प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब रोजाना ध्वनि स्तर नापेगा

​मांग पत्र पर त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रशासनिक तंत्र ने मैदानी स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना लागू करने की तैयारी कर ली है। संवेदनशील और घनी आबादी वाले मोहल्लों में ध्वनि की तीव्रता मापने के लिए विशेष तकनीकी टीमों की तैनाती की जाएगी। यह दल प्रतिदिन सुबह और शाम विभिन्न इलाकों का दौरा कर वास्तविक डेसिबल की रीडिंग दर्ज करेगा। इस व्यवस्था से तय सीमा से अधिक तेज आवाज पाए जाने पर सीधे वैधानिक कदम उठाया जा सकेगा। प्रशासनिक अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि मोहल्ला स्तर पर गठित होने वाले निगरानी दल में स्थानीय नागरिकों की सहभागिता भी सुनिश्चित रहे। क्षेत्रवार रिपोर्ट तैयार होने से लापरवाह आयोजकों और ध्वनि विस्तारक संचालकों की जवाबदेही तय होगी।

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