साइंस कॉलेज के संत लाल खरे की याचिका पर जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने सुनाया निर्णय
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य शासन को निर्देश दिया है कि शासकीय साइंस कॉलेज जबलपुर से सेवानिवृत्त हुए एक लैब टेक्नीशियन को 65 वर्ष की आयु तक का संपूर्ण वेतन प्रदान किया जाए। हाई कोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों को विधि सम्मत पाते हुए शासन को यह भुगतान सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं। इस निर्णय से प्रदेश के अन्य तकनीकी शिक्षण संवर्ग के कर्मचारियों में भी अपने अधिकारों को लेकर नई उम्मीद जगी है।
शासन के 1997 और 2011 के परिपत्रों की व्याख्या पर आया फैसला
यह याचिका शासकीय साइंस कॉलेज जबलपुर में पदस्थ रहे लैब टेक्नीशियन संत लाल खरे की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एसके पाठक और अभिषेक सोनी ने अदालत के समक्ष तर्क प्रस्तुत किए। अधिवक्ताओं ने बताया कि राज्य शासन ने 6 मार्च 1997 को जारी अपने आधिकारिक परिपत्र में लैब टेक्नीशियन के पद को शिक्षक संवर्ग के समकक्ष मान्यता दी थी। इसके उपरांत भी याचिकाकर्ता संत लाल खरे को विभाग द्वारा वर्ष 2011 में महज 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवा से सेवानिवृत्त कर दिया गया था, जो कि प्रशासनिक त्रुटि थी।
अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि राज्य शासन ने 18 मई 2011 को एक और महत्वपूर्ण परिपत्र जारी कर महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष निर्धारित कर दी थी। इस संशोधित परिपत्र में जहां स्पष्ट रूप से लाइब्रेरियन और क्रीड़ा अधिकारियों को शिक्षक संवर्ग से बाहर रखा गया था, वहीं लैब टेक्नीशियन को पूर्ववत शिक्षक संवर्ग के अंतर्गत ही माना गया था। इन तर्कों और शासकीय नियमों का बारीकी से अध्ययन करने के पश्चात जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने याचिका स्वीकार कर ली और शासन को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता संत लाल खरे को 62 से 65 वर्ष की आयु तक की सेवा अवधि का पूरा वेतन एवं देय स्वत्वों का भुगतान किया जाए।
