नई दिल्ली. केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। दशहरा से पहले कर्मचारी संगठनों ने सरकार से बोनस की मौजूदा समय बढ़ाने की मांग की है. इसको लेकर नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस गणना की सीमा को 7,000 से बढ़ाकर 21,000 करने की मांग की है।
दरअसल, राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) ने वित्त मंत्रालय और केंद्र सरकार को पत्र लिखकर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप बोनस की सीलिंग रिवाइज करने का आग्रह किया है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस की गणना वर्ष 2014-15 से लागू अधिकतम 7,000 रुपये प्रति माह (या 230 रुपये प्रतिदिन) की वैधानिक सीमा पर की जाती है।
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि 7वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये प्रति माह तय किया गया था, इसलिए बोनस गणना की सीलिंग भी न्यूनतम 18,000 से 21,000 रुपये के दायरे में होनी चाहिए। 7,000 रुपये की पुरानी सीलिंग के कारण वास्तविक वेतन अधिक होने के बावजूद कर्मचारियों को 60-65 दिनों के बोनस के रूप में अधिकतम लगभग 17,951 रुपये ही मिलते हैं।
पत्र में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 25 अगस्त 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification No. S.O. 4710(E)) का हवाला दिया गया है। इस अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने न्यूनतम मजदूरी को 21,000 रुपए तय किया है। नियमों के मुताबिक, बोनस की गणना के लिए पात्रता सीमा न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं हो सकती। यह नई व्यवस्था 21 नवंबर 2025 से प्रभावी मानी गई है।
यदि सरकार 21,000 रुपये की सीमा स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों का बोनस बढ़कर तीन गुना तक (लगभग 50,000 से 53,000 रुपये के आसपास) हो जाएगा। इस फैसले से विशेष रूप से भारतीय रेलवे, डाक विभाग, रक्षा उत्पाद इकाइयों और केंद्र सरकार के नॉन-गाजटेड कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 10 वर्षों में महंगाई और जीवन यापन की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिसे देखते हुए आगामी त्योहारी सीजन (दीवाली) से पहले सरकार को इस पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। 11 मई 2026 की एनसी-जेसीएम बैठक में सरकार ने कहा था कि बोनस सीलिंग में बदलाव के बाद केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस पर विचार किया जाएगा। हालांकि, अभी 21,000 बोनस की मंजूरी नहीं हुई है।
