इससे पहले 21 सितंबर को जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच में मामले की सुनवाई प्रस्तावित थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मामले को दूसरी उपयुक्त बेंच में भेजने की मांग की। सरकार की ओर से कहा गया कि FIR में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल हैं, इसलिए इसकी सुनवाई संबंधित बेंच में होनी चाहिए। सरकार की मांग का नेहा पच्चीसिया के वकीलों ने विरोध किया। उनका कहना था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं पिछली सुनवाई के बाद जोड़ी गई हैं, इसलिए मामले की सुनवाई पहले से तय बेंच में ही होनी चाहिए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने केस डायरी देखी। कोर्ट ने मामले को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली उपयुक्त बेंच के समक्ष भेजने का निर्णय लिया।
भ्रष्टाचार मामलों के लिए अलग बेंच-
हाईकोर्ट में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अलग बेंच निर्धारित है। जस्टिस संदीप एस कलगांवकर की सिंगल बेंच ऐसे मामलों की सुनवाई करती है। वहीं जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच भी इन मामलों की सुनवाई करती है। प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट को चुनौती दिए जाने की प्रकृति के आधार पर तय होगा कि नेहा की याचिका सिंगल बेंच में सुनी जाएगी या डिवीजन बेंच में।
FIR रद्द करने की मांग-
पूर्व CSP नेहा पच्चीसिया ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने अंतरिम राहत की भी मांग की थी। नेहा की ओर से FIR में अपनी भूमिका से इनकार किया गया है। उनके वकील का कहना है कि उनके खिलाफ कोई सीधे सबूत नहीं हैं। राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। सरकार के मुताबिक, जिला कोर्ट से नेहा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। इसके बाद नेहा सहित अन्य आरोपियों पर इनाम भी घोषित किया गया है। मामले में अब 22 सितंबर को नई बेंच के समक्ष सुनवाई होगी।