जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर, बालाघाट, सिवनी, डिंडौरी और विदिशा समेत प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में मौसम में अचानक बदलाव और तापमान में बढ़ोतरी के कारण धान की खड़ी फसल पर गंभीर बीमारियों और हानिकारक कीटों का प्रकोप फैल गया है। इस विकट स्थिति को देखते हुए जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, राज्य कृषि विभाग तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक और कृषि विज्ञानी लगातार खेतों का निरीक्षण कर रहे हैं। कृषि विभाग के संयुक्त संचालक केएस नेतराम के अनुसार प्रभावित संभागों में विशेष टीमें तैनात की गई हैं। वहीं विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ डॉ. अमित झा ने किसानों को तत्काल सावधानी बरतने और बासमती धान को बचाने हेतु अधिकृत कीटनाशक अनुशंसित मात्रा में छिड़कने की विस्तृत वैज्ञानिक एडवाइजरी जारी की है।
खेतों में भूरा माहू चूस रहा फसलों का रस
कृषि विज्ञानियों के अनुसार धान की फसलों को सबसे गहरा नुकसान भूरा माहू कीट पहुंचा रहा है, जो पौधों के निचले तने पर चिपका रहकर लगातार रस चूस लेता है। इसका संक्रमण अत्यधिक बढ़ने पर खेत के बीचों-बीच जगह-जगह पौधे पूरी तरह सूखने लगते हैं और गोलाकार सूखे पैच दिखाई देने लगते हैं। वैज्ञानिक शब्दावली में इस विनाशकारी स्थिति को हॉपर बर्न के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा तना छेदक कीट की खतरनाक सुंडी सीधे पौधे के तने के भीतर प्रविष्ट होकर उसे अंदर से खोखला कर देती है। इसके चलते धान के पौधे के बीच का हिस्सा और गोभ सूख जाती है, जिसके परिणामस्वरूप पौधों से केवल सफेद थोथी बालियां बाहर निकलती हैं।
फसल में दाना बनते समय बढ़ता है जोखिम
कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट आकलन है कि धान की बालियों के निकलने, उनमें दाने के भराव और फसल के परिपक्व होने की अवधि में कीट व फफूंद जनित रोगों का हमला सर्वाधिक घातक साबित होता है। यदि समय रहते इस पर प्रभावी रोकथाम न की जाए तो न केवल समग्र उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है, बल्कि बासमती चावल के दानों की चमक और बाजार गुणवत्ता पर भी गंभीर प्रतिकूल असर पड़ता है। खेतों में ब्लास्ट रोग के लक्षण दिखने पर पत्तियों पर गहरे धब्बे उभर आते हैं और बाद में बालियों की गर्दन प्रभावित हो जाती है। वहीं शीथ ब्लाइट के कारण पत्तियों के आवरण और मुख्य तने के जोड़ पर धब्बों का फैलाव होने लगता है।
वैज्ञानिक सलाह से तुरंत करें कीटनाशक छिड़काव
डॉ. अमित झा ने किसानों से आग्रह किया है कि वे अपने खेतों का हर दिन सूक्ष्मता से निरीक्षण करें और पत्तियों के पीले पड़ने या सूखने के शुरुआती लक्षणों को कतई नजरअंदाज न करें। भूरा माहू का हमला दिखने पर विशेषज्ञ सलाह के आधार पर केवल पंजीकृत डायनोटेफ्यूरान रसायन या प्रामाणिक कीटनाशकों का ही प्रयोग करें। छिड़काव के समय नोजल को पौधों के निचले तने तक अवश्य केंद्रित रखें। साथ ही खेतों में अनावश्यक पानी भराव न रहने दें और यूरिया का अनियंत्रित उपयोग बिल्कुल बंद कर दें। किसी भी रासायनिक दवा का छिड़काव केवल साफ मौसम में तथा सुरक्षात्मक उपकरण पहनकर निर्धारित मात्रा अनुसार ही करना चाहिए।
