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जबलपुर में बिजली कर्मियों से लगातार जबरन ड्यूटी, श्रम कानूनों को ठेंगा



जबलपुर। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जबलपुर सिटी सर्किल में पदस्थ पश्चिम शहर संभाग के कार्यपालन अभियंता पर श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाने के गंभीर आरोप लगे हैं। मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए व्यवस्था पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि 4 सितंबर को जिम्मेदार अधिकारी ने सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक काम करने वाले 16 लाइन कर्मियों को घर जाने के बजाय तत्काल दूसरी शिफ्ट में झोंक दिया। इस गैरकानूनी फरमान का विरोध करते हुए संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी केएन लोखंडे, एसके शाक्य, एसके सिंह, एसके मौर्य, मोहन दुबे, शशि उपाध्याय, दशरथ शर्मा, मदन पटेल और प्रदीप पांडे ने कंपनी के उच्च प्रबंधन से दोषी अधिकारी पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई है।

त्योहार के नाम पर बंधुआ मजदूरी कराई

​विभागीय आदेश के तहत जन्माष्टमी पर्व के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने का हवाला देकर लाइन स्टाफ को लगातार कार्यस्थल पर रोके रखा गया। तकनीकी कर्मचारियों का काम बिजली के खंभों पर चढ़कर जान जोखिम में डालकर फॉल्ट सुधारना होता है। लगातार 16 घंटे तक बिना किसी विश्राम के ऐसा जोखिम भरा कार्य कराना न केवल अमानवीय है, बल्कि सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन भी है। फील्ड में पसीना बहाने वाले मैदानी अमले की सेहत, मानसिक संतुलन और जीवन सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। विभागीय नियमों के अनुसार किसी भी तकनीकी कर्मचारी से सामान्य कार्य अवधि के बाद बिना पर्याप्त विश्राम या अतिरिक्त सुरक्षा इंतजामात के इतनी लंबी अवधि तक ड्यूटी नहीं ली जा सकती।

हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी

​त्योहारों के दौरान शहर में विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त रखना बेहद महत्वपूर्ण कार्य है, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी। अधिकारियों ने ऐसा करने के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार पूर्व से काम कर रहे दल पर ही पूरा दबाव डाल दिया। अत्यधिक काम के बोझ और शारीरिक थकान के चलते फील्ड में कभी भी गंभीर जानलेवा दुर्घटना घटित हो सकती थी। तकनीकी संगठन ने स्पष्ट किया है कि बिजली व्यवस्था सुचारू रखना उनकी प्राथमिकता है, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर मैदानी स्तर पर कर्मियों का उत्पीड़न कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब समूचा संगठन इस तानाशाहीपूर्ण रवैये के खिलाफ एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई का मन बना रहा है।

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