जबलपुर। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा के आयोजन को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय में आयुक्त अभिषेक सिंह ने शिक्षक संगठनों के संयुक्त मोर्चा प्रतिनिधियों के साथ गहन मंत्रणा की। बैठक में आयुक्त ने स्पष्ट किया कि स्कूल शिक्षा विभाग इस वर्ष केवल एक बार ही यह पात्रता परीक्षा ले सकेगा, जिसे 31 दिसंबर से पहले संपन्न कराने का पूरा लक्ष्य तय किया गया है। कर्मचारी संगठनों ने विभाग से पहले पात्र अध्यापकों की स्पष्ट सूची जारी करने की मांग रखी साथ ही वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों के लिए इस प्रक्रिया का खुला बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया। जबलपुर में भी इस मामले को लेकर लगातार गहमागहमी बनी हुई है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल से ऑफलाइन परीक्षा कराने की तैयारी
कर्मचारी चयन मंडल ने पारंपरिक पेन-पेपर यानी ऑफलाइन पद्धति से इस व्यापक परीक्षा को कराने में अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। इस असमर्थता के सामने आने के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग ने माध्यमिक शिक्षा मंडल के जरिए समूचा इम्तिहान आयोजित कराने की संभावनाओं को टटोलना शुरू किया है। हालांकि इस संबंध में अंतिम आधिकारिक मुहर लगना बाकी है, फिर भी अन्य सक्षम एजेंसियों से संपर्क साधा जा रहा है। परीक्षा के विस्तृत दिशा-निर्देश, नियम और शर्तें जल्द सार्वजनिक की जाएंगी।
पात्रता नियमों और छूट का लिखित आदेश जारी होगा
विभाग आगामी दिनों में यह स्पष्ट करेगा कि प्राथमिक, माध्यमिक अथवा उच्च वर्ग के किन पदों पर कार्यरत अध्यापकों को पर्चा देना अनिवार्य रहेगा। इसके साथ ही किन संवर्गों को इस पूरी कवायद से राहत अथवा छूट प्रदान की जाएगी, इसका ब्योरा भी लिखित रूप में सबके सामने रखा जाएगा। मोर्चा पदाधिकारियों ने प्रशासन पर दबाव बनाया है कि नियमों में पारदर्शिता के बिना आवेदन की प्रक्रिया सुचारु रूप से आगे नहीं बढ़ सकती। आधिकारिक स्पष्टीकरण आने के उपरांत ही शिक्षक अपनी अगली रणनीति तय करेंगे।
शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने पर कड़ा विरोध
शिक्षक संगठनों का साफ मत है कि आरटीई एक्ट लागू होने की तय समय-सीमा से पहले सेवा में आए किसी भी वरिष्ठ कर्मी को अब अपनी योग्यता सिद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं है। संयुक्त मोर्चा इस इम्तिहान के पूर्णतः विरुद्ध खड़ा दिखाई दे रहा है और उसने जमीनी स्तर पर सभी अध्यापक साथियों से अपील की है कि वे इस प्रस्तावित व्यवस्था का हिस्सा न बनें। दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर अडिग रहने से विभाग के सामने तय समय में प्रक्रिया पूरी करने की कड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
