जबलपुर। मध्यप्रदेश की बढ़ती बिजली जरूरत को पूरा करने के लिए सारनी स्थित सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में 660 मेगावाट की नई सुपरक्रिटिकल इकाई का निर्माण जारी है। इस परियोजना के कार्यों की गति और वर्तमान स्थिति जानने के लिए ऊर्जा प्रमुख सचिव और मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के चेयरमैन मनीष सिंह ने 19 सितंबर को जमीनी स्तर पर समीक्षा की। उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी तकनीकी क्षेत्रों का जायजा लेते हुए मुख्य अभियंता सुशील कुमार लिल्हारे, बीएचईएल के प्रोजेक्ट मैनेजर और वरिष्ठ अभियंताओं के साथ भावी चरणों की कार्ययोजना पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के साथ तय समयसीमा में काम पूरा करने का स्पष्ट लक्ष्य दिया।
इंजीनियर हर तकनीकी पहलू पर तुरंत कदम उठाएं
प्रमुख सचिव ने कार्यस्थल पर पहुंचकर मुख्य रूप से बॉयलर-टरबाइन-जनरेटर हिस्से में जारी स्ट्रक्चरल गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने मौके पर मौजूद तकनीकी टीम से नक्शों, सिविल कार्यों और आगामी चरणों के टाइमलाइन चार्ट की वास्तविक स्थिति समझी। अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए कि सभी कार्य पैकेज एक-दूसरे से तालमेल बनाकर आगे बढ़ें, जिससे किसी भी स्तर पर देरी न हो। उन्होंने निर्माण प्रक्रिया में उपयोग होने वाली सामग्री की तकनीकी मजबूती और सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा। अलग-अलग कार्यदायी एजेंसियों के बीच आपसी संवाद को लगातार बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी व्यवस्था लागू करने को कहा गया है।
सतपुड़ा ताप विद्युत गृह संचालन का भी आकलन
निरीक्षण के अगले चरण में ऊर्जा प्रमुख सचिव ने वर्तमान में चल रहे पूरे संयंत्र के बिजली उत्पादन और तकनीकी प्रबंधन की स्थिति पर बातचीत की। उन्होंने मुख्य अभियंता और प्लांट के शीर्ष तकनीकी अधिकारियों से दैनिक उत्पादन क्षमता तथा मशीनों की कार्यप्रणाली का विवरण लिया। यह आधुनिक सुपरक्रिटिकल इकाई भविष्य में राज्य को भरोसेमंद और पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभाएगी। इसके बनने से पारंपरिक इकाइयों की तुलना में कम ईंधन खपत के साथ अधिक मात्रा में बिजली का उत्पादन संभव हो सकेगा। अधिकारियों को हिदायत दी गई कि आने वाली चुनौतियों का समय से पहले समाधान निकालें ताकि उत्पादन का काम तय लक्ष्य के अनुसार शुरू हो सके।
