जबलपुर। जिले की जनपद पंचायत बरगी के अंतर्गत ग्राम पंचायत चिरपोंडी के वन कक्ष क्रमांक RF-150 में वर्ष 1982-83 के दौरान बरगी बांध परियोजना से प्रभावित होकर विस्थापित किए गए आदिवासी परिवारों ने बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर जिला कलेक्टर को एक औपचारिक आवेदन सौंपा है। विस्थापन के 40 साल बीत जाने के बाद भी इस बस्ती में पक्की पहुंच मार्ग और सुरक्षित पेयजल का स्थायी प्रबंध नहीं हो पाया है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों का दैनिक जीवन भारी संकटों से घिरा रहता है। अपनी इसी बदहाली से निजात पाने के उद्देश्य से ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक मुखिया के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें संबंधित विभागों के माध्यम से मार्ग निर्माण और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का पुरजोर आग्रह किया गया है।
कच्चे रास्तों और मानसूनी कीचड़ ने बढ़ाई मुसीबत
जंगल के इस रिहायशी इलाके तक आवागमन हेतु सुगम संपर्क पथ उपलब्ध नहीं है। मानसूनी दौर में उबड़-खाबड़ पगडंडियां दलदल में तब्दील हो जाती हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में बीमार व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना असंभव प्रतीत होने लगता है। स्कूली विद्यार्थियों को भी शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने के लिए भारी शारीरिक मशक्कत झेलनी पड़ती है, जबकि कृषि व मजदूरी पर आश्रित आबादी का बाहरी मंडियों से संपर्क टूट जाता है। वाहन चालकों द्वारा इस दुर्गम मार्ग पर आने से मना करने के कारण आवश्यक वस्तुएं सिर पर ढोकर ले जानी पड़ती हैं। परिवहन संपर्क विहीनता के चलते क्षेत्र का सामाजिक और आर्थिक विकास पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है, जिससे रोजमर्रा के काम बुरी तरह प्रभावित होते हैं।
प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भरता बनी मजबूरी
गांव के रहवासियों के लिए नलकूप अथवा नल-जल योजना जैसी व्यवस्थाएं अभी तक स्थापित नहीं की गई हैं। घर-परिवारों को अपनी प्यास बुझाने तथा दैनिक कार्यों को पूरा करने के लिए दूरदराज के झिरिया और अस्थायी जल स्रोतों का दूषित पानी छानकर उपयोग करना पड़ता है। गर्मी का मौसम प्रारंभ होते ही भूजल स्तर गिरने से यह संकट गहरा जाता है और महिलाओं को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। दूषित पानी के सेवन से मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है और जनस्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। प्रशासनिक उपेक्षा से त्रस्त ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया है कि संबंधित एजेंसियों को मौके पर निरीक्षण हेतु निर्देशित किया जाए, ताकि जलापूर्ति और सड़क की परियोजनाएं अविलंब स्वीकृत होकर धरातल पर क्रियान्वित हो सकें।
